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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. अच्छी मेजबानी और बेहतर व्यवस्थाओं के बल पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ग्वालियर के कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम ने अच्छा मुकाम बनाया था लेकिन गुरुवार को भारत व पाकिस्तान के बीच खेले गए चौथे एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच की बदइंतजामी ने क्रिकेट प्रेमियों को द्रवित और ग्वालियर शहर को शर्मसार कर दिया।
ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आपसी तालमेल के अभाव में अधिकांश व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। टिकट होने के बावजूद सैकड़ों लोगों को पुलिस ने मार-पीटकर ही नहीं भगाया, बल्कि खान-पान की वस्तुओं के साथ ही पानी को भी लोग तरस गए।
स्टेडियम के सभी द्वारों की व्यवस्थाएं पुलिस व प्रशासन के आला अफसरों के हाथों में थी लेकिन मैच शुरू होने से पहले ही अधिकांश द्वारों पर अफरातफरी की स्थिति निर्मित हो गई। विशेषकर गैलरियों में टिकटधारियों की लंबी कतारें होने के बावजूद प्रवेश बंद कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि आक्रोशित लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और वे पुलिसकर्मियों से उलझते देखे गए।
कमोवेश यही स्थिति पवेलियन के मुख्य द्वार पर रही। इस द्वार पर पुलिस के आला अफसर मौजूद थे, इसके बावजूद प्रवेश के लिए लोगों को जद्दोजहद करना पड़ी। सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अफसरों के निर्देश पर पुलिस का रवैया लोगों के प्रति ही नहीं बल्कि आयोजकों के प्रति भी काफी कड़क रहा। पवैलियन एवं अन्य स्टैंड्स पर खान-पान व्यवस्थाओं का जिम्मा जिन लोगों को सौंपा गया था, पुलिस ने उन्हें समय पर अंदर ही नहीं जाने दिया।
इतना ही नहीं गैलरी के दर्शकों के लिए आए पानी के टैंकरों को भी स्टेडियम परिसर में नहीं आने दिया गया। हजारों रुपये खर्च करके मैच का लुत्फ उठाने पहुंची शहर की हाई जेंट्री को पानी तक नसीब नहीं हो पाया।
जब कुछ लोगों द्वारा जीडीसीए के पदाधिकारियों तक अपनी आपत्ति पहुंचाई गई, तब कहीं जाकर पानी की कुछ बोतलें कुछ लोगों तक पहुंचाई गईं। इतना ही नहीं रिफ्रेसमेंट के पैकेट्स की क्वालिटी भी घटिया स्तर की थी। इसमें रखी अधिकांश सामग्री खाने योग्य नहीं थी।
व्यवस्थाओं पर निरंकुशता हावी रही। समन्वय के अभाव के जीडीसीए के पदाधिकारी ही अपनी ढपली पर अपना राग अलापते रहे। लगभग सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिकर्मियों ने ताले लटका दिए थे। न लोगों को बाहर निकलने दिया जा रहा था और न ही अंदर जाने दिया जा रहा था। इसे लेकर कुछ लोगों की पुलिसकर्मियों से झड़प भी हुई।
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अफसरों का बर्ताव देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कि सब कुछ जान बूझकर कर रहे हों। टिकट के साथ आने वालों को तो प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था, किंतु खाकी वर्दीधारियों के साथ आने वालों को बिना किसी पूछताछ के अंदर जाने दिया जा रहा था।
ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के लिए मैच के आयोजन का यह पहला अवसर नहीं था। इससे पहले भी दस मैच आयोजित हो चुके हैं। लेकिन जिस तरह की बदइंतजामी इस मैच में देखने को मिली, वह इससे पहले कभी नजर नहीं आई। माधवराव सिंधिया अधिकांश व्यवस्थाओं की कमान अपने पास रखते हुए उस पर चौकस निगाह रखते थे लेकिन आज स्थितियां बदली हुई थीं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा लोगों को जिस विश्वास के साथ जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, वे व्यवस्था बनाने में अक्षम व असफल साबित हुए। उन्होंने व्यवस्थाएं बिगाड़ने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर चाहे मामला कंपलीमेंटरी प्रवेश पत्रों के बंटवारे का हो या टिकटों की बिक्री का या फिर स्टेडियम की व्यवस्थाओं का। इन गड़बड़ियों से ग्वालियर की छवि खराब हुई है।
विशेषकर उन लोगों की नजर में, जो काफी दूर से मैच देखने ग्वालियर आए थे। इनमें से कई लोग ऐसे भी रहे, जिन्हें टिकट निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर ब्लैक में खरीदना पड़ा तथा ग्वालियर आकर होटल या धर्मशाला करना पड़ी। हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी इन लोगों को आयोजकों की लापरवाही से निराश लौटना पड़ा।
व्यवस्थापकों ने ही बिगाड़ी व्यवस्था
जीडीसीए के पदाधिकारी प्रेस बाक्स के इंतजामों को लेकर जिस कथित गंभीरता का परिचय दे रहे थे, उसकी आज कलई खुल गई। लोकल प्रेस बाक्स में पत्रकार नाम मात्र को ही थे। अधिकांश लोग वे थे जिन्हें मीडिया कमेटी में शामिल लोगों ने पास देकर उपकृत किया था।
इसका परिणाम यह हुआ कि कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को बैठने तक का स्थान नहीं मिला। यहां गौरतलब है कि मीडिया कमेटी ने एक-एक पास को लेकर शहर के प्रमुख अखबारों से काफी जद्दोजहद की थी, मगर यह जद्दोजहद दिखावा ही साबित हुई।
सूत्रों के मुताबिक मीडिया कर्मियों के नाम पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से जो कंपलिमेंटरी प्रवेश पत्र हासिल किए गए थे, उन्हें ऐसे लोगों को बांटा गया जिनका मीडिया से कोई सरोकार नहीं था। इतना ही नहीं एक जिम्मेदार सदस्य ने तो अपने मुनाफे के लिए ऐसे कई पासों को ब्लैक में बेच दिया। इस मामले की जानकारी एमपीसीए चेयरमैन व जीडीसीए के चेयरमैन तक भी पहुंचाई गई है।