जयपुर. सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में अगले साल से स्टेम सेल थैरेपी शुरू हो जाएगी। इसके लिए कॉलेज ने बारह करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट इंडियन काउंसिल
मेडिकल रिसर्च सेंटर को भेजा है। प्रोजेक्ट के तहत कॉलेज में दो हजार स्क्वायर फीट में स्टेम लैब बनेगी। स्टेम सेल कमेटी ने लैब का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी को भेजा है। इसके अगले वर्ष जून में तैयार होने की संभावना है।
इसके बाद ब्लड कैंसर मल्टीपल माइलोमिया और हार्ट अटैक आदि पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो जाएगा। लैब में स्टेम सेल जनरेट होंगी। रोगी को ट्रायल के दौरान बिड़ला कैंसर सेंटर के बोन मैरो सेंटर में रखा जाएगा। इससे रोगी को इंफेक्शन से बचाया जा सकेगा। सात वर्षीय इस प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न रोगों पर शोध होंगे। इसके लिए एसएमएस कॉलेज के प्रोफेसर्स और असिसटेंट प्रोफेसर्स की तीस सदस्यीय टीम बनाई गई है। टीम के सदस्यों को प्रशिक्षण के लिए देश के अन्य मेडिकल इंस्टीट्यूट्स और कॉलेजों में भेजा जा रहा है।
इनका इलाज होगा
ब्लड कैंसर: मल्टीपल माइलोमा
हार्ट से संबंधित बीमारियां
इन पर होगा रिसर्च
थैलेसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया, मल्टीपल स्कोलोरिसस, स्किन से संबंधित बीमारियां, वीटी लिगो, मसल्स, कॉर्निया, बाल गिरना, यूरोलोजी, रीढ़ की हड्डी का इलाज।
दर्द रहित थैरेपी
प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर डॉ. सुधीर मेहता ने बताया कि एसएमएस में फेरिफिहरल ब्लड टेक्निक से स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा। इसमें रोगी को सीरिंज की सहायता से स्टेम सेल दी जाएगी। बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन में रोगी को दर्द होता है। यह थैरेपी दर्द रहित होती है। इसके अलावा स्टेम सेल यूके की ऑटोलोगस टेक्निक से ली जाएगी। इसमें रोगी ही डोनर होगा।
स्टेम सेल क्या है:
स्टेम सेल शरीर के वे सेल हैं, जो तुरंत किसी भी फॉर्म में री-जनरेट हो जाते हैं। ये जिस हिस्से में ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, उसे पूरी तरह ठीक कर देते हैं।
कितने समय में ब्लड बनता है
बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के बाद रोगी में ब्लड बनने में सौ दिन का समय लगता है। इस समयावधि में ब्लड नहीं बनने पर स्टेम सेल बेकार हो जाते हैं।
* कॉलेज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए स्टेम थैरेपी शुरू किए जाने की पहल की गई है।
डॉ. अशोक पनगड़िया, प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
डेढ़ से दो लाख खर्च
क्लिनिकल ट्रायल शुरू में पांच रोगियों पर किया जाएगा। इसमें रोगी को ठीक होने में चार से छह सप्ताह लगेंगे। इस ट्रीटमेंट पर डेढ़ से दो लाख रुपए तक का खर्च आएगा।
सौ एमएल स्टेम सेल की जरूरत
सोनी हॉस्पिटल में कैंसर सेंटर के इंचार्ज डॉ. अनीष मारु ने बताया कि हालांकि रोगी के वजन और आयु के अनुसार स्टेम सेल की जरूरत होती है। फिर भी सामान्य तौर पर सौ एमएल स्टेम सेल लेना जरूरी है। इसके लिए डोनर का पंद्रह सौ एमएल ब्लड लिया जाता है। इसमें से चौदह सौ एमएल ब्लड डोनर को वापस चढ़ा दिया जाता है। इससे डोनर को कोई नुकसान नहीं होता है।