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अध्र्य देने उठेंगे हजारों हाथ

बिलासपुर. chat पुत्र प्राप्ति, समृद्धि एवं मंगलकामना का पर्व छठ शुक्रवार को पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। छठ माता एवं सूर्य देवता को समर्पित इस पर्व के लिए छठघाट सज-संवरकर तैयार हो गया है। पिछले पखवाड़े से ही घाट पर साफ-सफाई एवं व्यवस्था बनाने निगम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। यहां जूनो लाइट, फव्वारों के साथ आकर्षक विद्युत सज्जा भी की गई है।

गत वर्ष पार्किग को लेकर हुई दिक्कत के बाद इस साल इसके लिए पृथक से व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पूजा करने खाली पांव आ रहे श्रद्धालुओं को राहत दिलाने पूरे घाट पर कारपेटिंग भी की जा रही है। ट्रेफिक जाम की परेशानियों से निजात पाने यातायात विभाग ने भी विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

शुक्रवार दोपहर से ही गुरुनानक चौक, छठघाट मोड़, राजकिशोर नगर, मोपका तिराहा आदि स्थानों पर यातायात जवानों की डच्यूटी लगा दी गई है। इसके अलावा इस ओर आने वाले भारी वाहनों को शहर की सीमा से पहले ही बाइपास मार्गो के द्वारा निकाल लिया जाएगा।

छठपूजा के बारे में मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से छठ माता की आराधना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। आमतौर पर अन्य पर्वो में किसी भगवान की मूर्ति को प्रतीक मानकर पूजन किया जाता है, परंतु छठ में सूर्य देवता की प्रत्यक्ष पूजा की जाती है।

व्यावसायिक एवं अन्य कारणों से बड़ी संख्या में यहां आकर बस चुके बिहार एवं उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों द्वारा मनाए जाने वाला यह पर्व धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति में भी मिलता जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस अवसर पर छठघाट में जाते हैं। यह एकमात्र पूजा है, जिसमें पहले डूबते हुए फिर उगते सूर्य की पूजा की जाती है। इस पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

इसमें चढ़ाया जाने वाला प्रसाद पूरी तरह घर में ही बनाया जाता है तथा बाजार से खरीदे गए प्रसाद का इस पूजा में कोई उपयोग नहीं होता। गेहूं के आटे और गुड़ को मिलाकर बनाए जाने वाले ठेकुआ, टिकरी आदि के लिए गेहूं को धोकर सुखाया जाता है, इसे चिड़िया आदि से बचाने के लिए बाकायदा व्यवस्था भी की जाती है। मान्यता है कि छठपूजा के प्रसाद में किसी भी प्रकार की अशुद्धि की तत्काल दैवीय सजा मिलती है।

पिछले कई दिनों से पूजा के लिए तैयारियों एवं घाट को संवारने के लिए छठपूजा आयोजन समिति की लगातार बैठकें हो रही हैं। इसमें आयोजन समिति के संरक्षक एसपी सिंह, विजय प्रताप सिंह, वीएन झा, आरडी सिंह, अध्यक्ष एचपीएस चौहान, सुनील सिंह, प्रवीण झा सहित अन्य सदस्य शामिल हो रहे हैं।

तैयारियों के संबंध में उन्होंने बताया कि पुत्र प्राप्ति, पारिवारिक शांति एवं समृद्धि के लिए की जाने वाली छठ पूजा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस साल पिछले वर्ष की तुलना में काफी लोगों के पूजा में आने की संभावना है, इसे देखते हुए विशेष प्रबंध किया गया है।

विधि-विधान से बना ‘खरना’
गुरुवार की शाम छठ व्रतियों के घरों में पूरे विधि-विधान से खरना बनाया गया। लोगों ने श्रद्धापूर्वक ‘खरना’ ग्रहण किया। श्रीमती पुष्पा सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह से छठ व्रतियों ने निर्जला व्रत रखा। शाम को आंगन मंे चूल्हे पर खीर और रोटी का प्रसाद बनाया गया। इस विशेष खीर में शक्कर के स्थान पर गुड़ का प्रयोग किया जाता है। परिवारजनों के साथ नाते-रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।

क्या होगा ‘दवरा’ में
सूर्य को अध्र्य देने के लिए शुक्रवार शाम को छठव्रती पूजन सामग्री से सजा हुआ दवरा(सूपा) सिर पर लेकर नंगे पांव छठघाट पहुंचेंगे। दवरा में गेहूं के आटे से बने ठेकुआ के साथ नारियल, नींबू, गन्ना, सेब, केला, अदरक, कच्च हल्दी, कच्च चना, दीप सहित अन्य पूजन सामग्री होगी।

शाम को भरी जाएगी ‘कोशी’
अध्र्य देने के बाद शाम को घाट से वापस घर लौटने के बाद घर के आंगन में कोशी भरी जाती है। इसमें मिट्टी के दीपक के चारों ओर 7 या 9 गन्ने को सजाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से इसकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसकी पूजा करने पर मन्नत पूरी होती है।

देर रात तक छठव्रती कोशी के चारों ओर बैठकर छठ मइया और सूर्य देवता की आराधना और ध्यान करते हैं। रात के तीसरे पहर में घर के पुरुष कोशी के दीपक को लेकर घाट पहुंचते हैं और इसका नदी में विसर्जन किया जाता है। अंधेरी रात में नदी में बहते जगमगाते दीयों की कतार काफी आकर्षक लगती है।

शुरू हुआ 36 घंटों का उपवास
खरना ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटों का उपवास शुरू हो गया। गुरुवार को भी सुबह से ही छठ व्रतियों ने निर्जला व्रत रखा। शाम को खरना ग्रहण किया गया। इसके बाद अब सीधे शनिवार की सुबह उगते सूरज को अध्र्य देने के बाद ही व्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगे। लगातार 36 घंटांे तक निर्जला व्रत रखकर छठ मइया और सूर्य देव की आराधना की जाएगी।

कल दिया जाएगा उगते सूरज को अध्र्य
शुक्रवार की शाम डूबते सूरज को अध्र्य देने के बाद लोग अपने घर वापस लौट जाएंगे। इसके बाद रात को कोशी भरी जाएगी। शनिवार को सूर्योदय से पहले ही दवरा लेकर छठव्रती फिर से छठघाट पहुंच जाएंगे। हाथों में नैवेद्य और पूजन सामग्री लिए सूरज की पहली किरण का इंतजार किया जाएगा।

जैसे ही पूर्व दिशा से सूरज की पहली किरण फूटेगी, विधि-विधान पूर्वक सूर्य देव को अध्र्य दिया जाएगा। इसके बाद प्रसाद वितरण का दौर चलेगा। घाट में मौजूद छोटे-बड़े हर व्यक्ति को प्रसाद दिया जाएगा।

ट्रैफिक पुलिस ने की विशेष तैयारी
पूजा के दौरान छठ घाट में उमड़ने वाले जनसैलाब को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने इसकी विशेष तैयारी की है। शुक्रवार की दोपहर 2 बजे से दोनों ओर से तोरवा पुल पर वाहनों का आना-जाना प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। ये वाहन चालक आवागमन के लिए लिंगियाडीह में नवनिर्मित पुल का उपयोग कर सकेंगे।

भारी वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। राजकिशोर नगर की ओर से आने वाले लोगों के लिए स्मृति वन के गेट नंबर 2 के पास पार्किग व्यवस्था की गई है। वहीं गुरुनानक चौक की ओर से आने वालों के लिए पुल के पहले पार्किग बनाई गई है। केवल पास धारक वाहन ही घाट के गेट तक जा सकते हैं।





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