जोधपुर. जोधपुर डिस्कॉम के स्पॉट बिलिंग ठेके में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। डिस्कॉम के जोनल अकाउंट्स अफसर (ओएंडएम) की तथ्यात्मक रिपोर्ट
में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट मुताबिक स्पॉट बिलिंग का ठेका पाने वाली कंपनी मैसर्स केएलजी सिस्टल को ठेका देने में नियमों की अवहेलना की गई।
‘भास्कर’ में 27 सितंबर को ‘स्पॉट बिलिंग में 3.5 करोड़ का झटका’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद डिस्कॉम ने मामले को गंभीरता से लिया। रिपोर्ट के मुताबिक डिस्कॉम के लिए हर साल साढ़े तीन करोड़ के झटके का सबब बने इस ठेके का फैसला पर्चेज कमेटी की जिस बैठक में लिया गया, उसी दिन कंपनी के प्रतिनिधि ने फैक्स से अपनी सहमति भेज दी। इस कंपनी को वर्कऑर्डर देने में न केवल कई शिथिलताएं दी र्गई, बल्कि कंपनी की परफोरमेंस रिपोर्ट को प्राप्त ही नहीं किया गया।
सबसे बड़ी बात तो यही सामने आई है कि स्पॉट बिलिंग का सिस्टम लागू करने का फैसला राज्य स्तर पर सर्वसम्मति से जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट के लिए हुआ था। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद जोधपुर या अन्य जगहों के लिए फैसला किया जाना था, लेकिन जोधपुर में इसे बिना पूरी तैयारी लागू कर दिया गया।
क्या है मामला
जोधपुर डिस्कॉम ने स्पॉट बिलिंग का ठेका देने में निविदा जारी करते वक्त अनुमानित 2.50 रुपए प्रति उपभोक्ता की दर को दरकिनार करते हुए केएलजी कंपनी को 8.41 रुपए में ठेका दिया।
क्या है रिपोर्ट में
* टेंडर प्राप्त होने के बाद चीफ इंजीनियर (ओएंडएम) ने 25 जुलाई 06 को संबंधित अफसरों को टेक्निकल बिड का एनालिसिस नोट भेजते हुए फायनेंसियल तथा प्राइज बिड खोलने के लिए मीटिंग की चिट्ठी भेजी। चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह मीटिंग चिट्ठी जारी होने के दिन ही हुई।
* केएलजी कंपनी की फरफोरमेंस रिपोर्ट जानने के लिए तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने 31 जुलाई को यूपी पावर कारपोरेशन,लखनऊ सहित अन्य कपंनियों को चिट्ठी लिखते हुए महज 2 दिनों बाद यानी 2 अगस्त तक फैक्स से रिपोर्ट भेजने को कहा।
* चीफ इंजीनियर ने 3 अगस्त 06 को टेक्निकल मूल्यांकन के लिए एजेंडा नोट जारी करते हुए मीटिंग आहूत की, यह मीटिंग भी चिट्ठी जारी होने के दिन ही हुई। इस मीटिंग में केएलजी समेत मैसर्स सेंड्स यूटिलिटी प्राइवेट लिमिटेड की प्राइस बिड पर चर्चा हुई, जिसकी प्रोसीडिंग प्रबंध निदेशक ने अनुमोदित कर दी।
* प्राइस बिड खुलने के बाद ठेका देने के लिए निगम लेवल पर्चेज कमेटी की बैठक एक दिन के नोटिस पर 18 अगस्त को आहूत की गई, जिसमें जोनल अकाउंट्स ऑफिसर की विपरीत टिप्पणियों के बावजूद केएलजी को ठेका देने का फैसला कर लिया गया।
* चीफ इंजीनियर ने फैसला लेने के तुरंत बाद ही कंपनी को टेक्नो-कॉमर्शियल टर्म तय करने के लिए 23 अगस्त को प्रतिनिधि भेजने का पत्र भेज दिया।
* 3 बजे से मीटिंग, बाद में ठेका देने का फैसला और कंपनी को प्रतिनिधि भेजने का पत्र भेजने की कार्रवाई तो एक ही दिन में हुई ही, कंपनी के प्रतिनिधि ने भी शाम 5.15 बजे उदयपुर से प्रबंध निदेशक को फैक्स भेजते हुए सहमति भेज दी।
* तीसरे ही दिन 21 अगस्त को फिर पर्चेज कमेटी की बैठक हुई और केएलजी को 96 सब डिवीजन के लिए 7.50 रुपए प्रति उपभोक्ता (सर्विस टैक्स अलग) पर ठेका देने के लिए लेटर ऑफ इटेंट जारी कर दिया गया। सर्विस टैक्स मिलाने पर यह दर 8.41 रुपए प्रति उपभोक्ता बैठती है।
* ड्राफ्ट वर्कऑर्डर भी सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर से चैक हुए बिना ही 20 सितंबर 06 को जारी कर दिया गया। इसमें कंपनी को यह फायदा भी दिया गया कि यदि उपभोक्ता का मकान लॉक होता है या रीडिंग नहीं होती है तो भी उसे 4.21 रुपए प्रति उपभोक्ता दिए जाएंगे।
* अगर किसी को जांच ही करवानी थी तो उच्चस्तरीय अधिकारी से करवानी थी। जूनियर अफसर की रिपोर्ट की क्या वैल्यू? फैसला कमेटी ने लिया था। कमेटी में सब अफसर होते है। उसकी जांच कैसे संभव है?
—आर जी गुप्ता, तत्कालीन सीएमडी, जोधपुर डिस्कॉम
* तथ्यात्मक रिपोर्ट मेरे माध्यम से ही गई थी। एक बात है कि दूर-दराज के क्षेत्रों में इस दर पर भी बिल बांटना कंपनी के लिए घाटे का ही सौदा है।
—भुवनेशचंद्र माथुर, सीएमडी जोधपुर डिस्कॉम
* फिलहाल मेरे पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन अब जानकारी में आया है तो पता करके आवश्यक कदम उठाऊंगा।
—गजेन्द्रसिंह खींवसर ऊर्जा मंत्री
जोनल अकाउंट्स अफसर की रिपोर्ट ताक पर
पर्चेज कमेटी की बैठक के दिन ही जोनल अकाउंट्स अफसर से ठेका देने के संबंध में टिप्पणी मांगी गई। जोनल अकाउंट्स अफसर ने इतने कम समय में मूल्यांकन नहीं कर पाने की दलील देते हुए फौरी तौर पर नजर आने वाले 14 बिंदुओं को उठाया। इन बिंदुओं में कई ऐतराज नजरअंदाज कर ठेका देने का फैसला कर लिया गया। प्रमुख ऐतराज इस तरह हैं-
* टेंडर खोलने की तिथि बार-बार क्यों बढ़ाई गई? समय के बाद प्राप्त टेंडर को क्यों स्वीकार किया गया?
* मीटर रीडिंग, कम्पयूटराइजेशन ऑफ एनर्जी बिल तथा बिल वितरण चार्ज के रूप में 2.80 रुपए प्रति उपभोक्ता उपयुक्त है, जबकि कंपनी बहुत ज्यादा 8.41 रुपए मांग रही है।
* ग्रामीण उपभोक्ताओं की संख्या का सही आकलन नहीं करने से बेहतर प्रतिस्पद्र्धी टेंडर दाताओं से वंचित रहे।
* प्रारंभ में ठेका देने का फैसला ग्रामीण क्षेत्रों के लिए था, मगर बाद में शहरी इलाके भी जोड़ दिए गए।
* सफल निविदादाता अलग से कोई चार्ज नहीं वसूलता, लेकिन यह कंपनी कई एक्सट्रा चार्ज चाहती है।
* कंपनी की परफोरमेंस रिपोर्ट किसी अन्य बिजली कंपनी से प्राप्त नहीं हुई है।