सम्पादकीय. देश की किसी अति महत्वपूर्ण हस्ती के अपहरण की जैश-ए-मोहम्मद की साजिश का पर्दाफाश करके उत्तरप्रदेश पुलिस और संबंधित खुफिया एजेंसियों ने वाकई शाबासी पाने लायक काम किया है।
जैश की इस मुहिम को अंजाम देने निकले तीन हथियारबंद प्रशिक्षित पाकिस्तानी फिदायीन यदि अपने मकसद में कामयाब हो जाते तो अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा का हमारा पूरा तंत्र तो कठघरे में खड़ा होता ही, तेज राजनीतिक बवंडर भी उठता जिसे थामना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। जैश इस अति महत्वपूर्ण व्यक्ति का अपहरण करके उसकी रिहाई के बदले अपने 42 आतंकियों की रिहाई और कुछ अन्य शर्ते रखने की फिराक में था।
इस आतंकी साजिश ने 1989 में विश्वनाथप्रताप सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के समय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया के अपहरण और 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के समय इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण की घटनाओं की यादें ताजा कर दी हैं। इन दोनों ही घटनाओं में तत्कालीन केंद्र सरकारों को अपहरणकर्ताओं की गैर-वाजिब शर्तो के आगे झुकना पड़ा था और तीखी आलोचनाओं का शिकार भी होना पड़ा था।
उत्तरप्रदेश के पुलिस महनिदेशक ने उस अति महत्वपूर्ण व्यक्ति के नाम का खुलासा तो नहीं किया है जिसके अपहरण की साजिश रची गई थी पर इस सवाल का कि क्या वह व्यक्ति गांधी परिवार का कोई सदस्य था, गोलमोल जवाब देकर रहस्य की धुंध गहरा दी है। उनका जवाब था, ‘न तो मैं कोई टिप्पणी करूंगा, न ही नाम का खंडन।’
उनका जवाब इस आशंका को जन्म देने के लिए काफी है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य जैश के निशाने पर था। और अगर इसमें थोड़ी भी सचाई है तो गांधी परिवार के सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था की फौरी तौर पर समीक्षा करके उसकी खामियां दूर करने के उपाय किए जाने चाहिए। राहुल गांधी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के मद्देनजर ऐसा किया जाना और भी जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि जैश का संस्थापक मौलाना मसूद अजहर उन तीन आतंकवादियों में एक है जो 1999 में अपहरण करके कंधार ले जाए गए इंडियन एयरलाइंस के विमान के यात्रियों को मुक्त करने के बदले रिहा किए गए थे। रिहाई के बाद से मसूद अजहर भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलता रहा है।
उसके द्वारा खड़ा किया गया खूंखार संगठन जैश-ए-मोहम्मद 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले समेत कई आतंकी वारदातों में शामिल रहा है। अपहरण की ताजा साजिश में नाकाम रहने के बाद वह किसी दूसरी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में जुट सकता है। ऐसे में एक अनहोनी को टालना ही काफी नहीं है, सुरक्षा एजेंसियों को चौकस रहकर ऐसी हरेक साजिश को नाकाम करना होगा।