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राखी बलवा, जांच अफसर बदला

रायपुर. मंदिरहसौद टीआई सविता दास इस मामले में खुद जांच के घेरे में हैं, इसलिए एसएसपी बीएस मरावी ने उनकी जगह जांच माना टीआई को सौंप दी। इस मामले में राखी के सरपंच समेत दर्जनभर लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। एफआईआर के एक-एक बिंदु की जब तक बारीकी से जांच नहीं हो जाती, ग्रामीणों की गिरफ्तारी नहीं होगी।

पिछले हफ्ते राखी गांव में गुस्साए ग्रामीणों ने न सिर्फ मंदिरहसौद थाने से गई पुलिस पार्टी पर हमला किया था, बल्कि उन्हें लेकर गई शराब ठेकेदार की जीप भी फूंक दी थी। इसी मामले में टीआई ने ग्रामीणों के खिलाफ बलवे की एफआईआर दर्ज की थी। आला अफसरों का कहना है कि राखी गांव का मामला शांत होने के बाद जब एफआईआर का परीक्षण किया गया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।

पुलिस के साथ मारपीट करनेवालों में सरपंच को भी आरोपी बनाया गया, जबकि उस वक्त वह थाने में मौजूद थे। जिस ग्रामीण से 70 लीटर पेट्रोल जब्त किया गया, उसका पेट्रोल से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं, पुलिस ने जिन ग्रामीणों को घटना के एक दिन पहले जुआ खेलने के आरोप में पकड़ा था, उन्हें भी बलवे में शामिल होना बताया गया है। जबकि ये सभी थाने में थे और उनके खिलाफ शाम 5 बजे प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद अदालत भेजा गया।

अफसरों ने संकेत दिए हैं कि महिला टीआई की एफआईआर से जहां कई बेकसूरों को फंसाए जाने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं पुलिस को बचाने की कोशिश भी करने के प्रमाण हैं। इन तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद ही जांच अधिकारी बदला गया और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।

गौरतलब है, राजधानी से करीब 20 किलोमीटर दूर राखी गांव में दिवाली के दूसरे दिन पुलिस ने आधा दर्जन ग्रामीणों को शराब तस्करी और जुआ खेलने के आरोप में पकड़ा था। पूरी रात थाने के लाकअप में रखने के बाद भी ग्रामीणों के खिलाफ न तो अपराध पंजीबद्घ किया गया, और न ही उन्हें रिहा किया गया। इससे गांववाले भड़क गए थे।

पुलिस जब गांव पहुंची, तो नाराज भीड़ ने हमला बोल दिया। टीआई सविता दास को वहां जान बचाकर भागना पड़ा। थाने का स्टाफ भी किसी तरह उग्र भीड़ से बचकर भागा। पुलिस वालों के हाथ से निकल जाने से खिन्न भीड़ का गुस्सा पुलिस कार्य में लगी जीप पर उतरा और ग्रामीणों ने गाड़ी जलाकर खाक कर दी थी। उसके बाद भी भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। आला अफसरों के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीण ठंडे पड़े।





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