News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
छत्तीसगढ़ी राजभाषा के विधेयक के मसौदे को 22 तारीख को कैबिनेट में अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक को विधि विभाग की सहमति के बाद संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में सूचना भिजवा दी है कि इसे पहले दिन ही प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
राजभाषा कैसे अमल में लाई जाएगी, इसके लिए राज्य शासन उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल की मदद ले रहा है। वहां स्थानीय बोली को पहले ही राजभाषा का दर्जा दिया जा चुका है। इस कारण संस्कृति विभाग के अफसरों ने उन राज्यों से मदद मांगी है।
एक-दो दिन में विस्तृत जानकारी यहां आ जाएगी। सरकार यह पता लगाने की कोशिश में है कि राजभाषा की शब्दावली और शब्दकोष कैसे बनाया जाएगा? छत्तीसगढ़ में उपलब्ध साहित्य को एकत्र करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ी में किताबें लिखने वालों की मदद ली जा रही है।
राजभाषा पर विधेयक लाने के साथ ही संविधान की आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी को शामिल का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। चूंकि राज्य के लिए यह पहला मामला है, इस कारण केंद्र सरकार के साथ किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इस बारे में भी अन्य राज्यों से मदद ली जा रही है। वैसे, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि विधानसभा में अब छत्तीसगढ़ी में बहस की जा सकती है।
वरिष्ठ सचिवों की समिति
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा पर आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए वरिष्ठ सचिवों की समिति बना दी है। इसमें मुख्य सचिव शिवराज सिंह, अपर मुख्य सचिव पी. जाय उम्मेन, प्रमुख सचिव विधि टीपी शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति टी. राधाकृष्णन और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव जवाहर श्रीवास्तव रखे गए हैं।