इंदौर.
दिन ढलने के ठीक पहले शुक्रवार को लोग पानी भरे कुंड में भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए उतर रहे थे। हाथ में सूपड़ा और उसमें अघ्र्य की सामग्री मौसमी फल, श्रीफल, गन्ना, गाजर, मूली और सब्जियां थीं। इस सामग्रियों के बीच दीपक जल रहे थे।
इसके साथ ही महिलाएं सूपड़े को पानी से स्पर्श करा रही थीं और पुरुष हाथ में अघ्र्य का सामान लेकर उसे सूर्यनारायण को अर्पित कर रहे थे। इसमें विशेष रूप से तैयार किया गया ठेकुआ महाप्रसाद के रूप में चढ़ाया गया। साथ ही छठ माता के भजन भी गाए जा रहे थे। इस बीच लोग भक्तिभाव के साथ भगवान सूर्य और छठ माता को याद कर रहे थे।
शहर में छठ पूजा के लिए कई स्थानों पर बनाए गए पानी के कुंड और तालाबों के किनारे पूर्वाेत्तर भारत के परिवार बड़ी संख्या में जमा थे। उनके साथ ही शहर के अन्य लोग भी व्यवस्था संभालने और पूजा देखने के लिए जुटे थे। शहर में स्कीम-54, विजयनगर, वीणानगर, कालानीनगर, बाणगंगा, सुखलिया, संगमनगर, बजरंगनगर कांकड़, पीपल्यापाला तालाब, तुलसीनगर, सुखनिवास कैट में सामूहिक रूप से छठ पूजा की गई।
कालानीनगर के शिवमंदिर परिसर में भोजपुरी समाज के अध्यक्ष बलेश्वर सिंह उपाध्यक्ष कलेश्वर सिंह के नेतृत्व में पूर्वाचल के लोगों ने छठ पूजा की। इसी तरह वीणानगर रहवासी संघ के सचिव ओम यादव ने बताया इस साल से वीणोश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी पूजा का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
उपवास करने वाले श्रद्धालु भीगे हुए कपड़ों में नजर आ रहे थे, जिनके साथ पूरा परिवार था और वे मदद कर रहे थे। उपवास करने वाली महिलाओं के साथ पुरुष अघ्र्य अर्पित कर रहे थे। इसके अलावा कुंड के बाहर घाट पर भी लोग पूजा कर रहे थे। इसमें कुछ लोग सामान्य पूजा कर रहे थे तो कोई मुख्य रूप से अघ्र्य दे रहा था। इस मौके पर आतिशबाजी भी की जा रही थी। साथ ही रात्रि जागरण के लिए भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी शुरुआत हुई।
आज उगते सूरज की आराधना
शनिवार सुबह उपवास करने वाले श्रद्धालु फिर पूजा स्थलों पर जुटेंगे और उगते सूरज को अघ्र्य देंगे। इसके लिए भी लोग ढोल-ढमाके के साथ दंडवत करते आएंगे। गुरुवार शाम को खरना के बाद शुरू किए गए उपवास का समापन शनिवार सुबह सूर्य को अघ्र्य देने के बाद होगा।
दंडवत करते हुए भी आए श्रद्धालु
स्कीम-54 में 70 साल की सज्ञानी झा मंदिर तक और 27 वर्षीय सुनीता सुखलिया से स्कीम-54 तक दंडवत करते हुए कुंड तक पहुंचीं। उनके पति सुबोध विश्वकर्मा ने बताया वे नालंदा जिले के हैं और यहां पिछले तीन सालों से अघ्र्य देने आते हैं।
छपरा के लोग करते हैं वेदी पूजा
श्रद्धालुओं ने बताया छपरा क्षेत्र के लोग छठ पूजा में घाट के बजाय वेदी की पूजा करते हैं। इसके लिए स्कीम-54 में तीन वेदियां हैं यहां महिलाएं पूजा कर रही थीं और भजन गा रही थीं। पानी में खड़े होकर पूजा करने वाले अधिकांश लोग पूर्वोत्तर भारत के होते हैं। स्कीम-54 में ठाकुर दीनानाथसिंह, निर्मल दुबे सहित कई लोगों ने मिलकर पूजा की व्यवस्था संभाली।
पत्नी के पांव छुए
स्कीम-54 में सूर्य आराधना कर रेखा शर्मा जैसे ही कुंड से बाहर आईं उनके पति सेंट्रल एक्साइज में सुप्रिंटेंडेंट विजय शर्मा दौड़कर आए और उनके पांव छुए। साथ में उनके बेटे जयंत भी थे। श्री शर्मा ने बताया छठ व्रत के दौरान महिला देवी स्वरूपा हो जाती है, उस वक्त उसके पांव छूकर आशीर्वाद लेना बहुत फलदायी होता है।
दूर-दूर से देखने आए छठ पूजा
यहां की पूजा देखने के लिए देश के दूरस्थ शहरों से भी लोग आए। बड़ौदा से कर्नल वी.जेड. झा अपने मित्र आर.पी. तिवारी के बुलावे पर पूजा देखने आए। वे कहते हैं ऐसा माहौल पहली बार देखा। इसी तरह कोलकाता से बुजुर्ग ब्रrानंद झा तीन सालों से पूजा देखने आ रहे हैं।
बलिया जिले के नारायणगढ़ से सौम्या तिवारी यहां पूजा के लिए आई हैं। उन्होंने अपने पति की अच्छी नौकरी की मन्नत मानी थी, जो पूरी हुई। कवि रामचंद्र पांडे जौनपुर से दूसरी बार यहां आए हैं।
मुस्लिम युवाओं ने संभाली व्यवस्था
स्कीम-54 में पूजा स्थल पर व्यवस्था पूर्वोत्तर भारतीय अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के मुस्लिम युवाओं ने संभाली। अध्यक्ष अमजद खान ने बताया वे लगातार तीन सालों से अपने परिवार के लोगों के साथ आकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। इनमें युवाओं के साथ ही परिवार की महिलाएं भी शामिल हैं।