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कृषि मंत्री के दामाद को लाखों के ठेके

जयपुर. राज्य कृषि विपणन बोर्ड में कृषि एवं सहकारिता मंत्री प्रभुलाल सैनी के दामाद और भतीजों को लाखों रुपए के टेंडर देने का मामला सामने आया है। सैनी prabhulal sainiके दामाद को तो बोर्ड ने ऐसे खेत पर दस लाख रुपए का फार्म पाउंड बनाने का काम दे दिया जो दामाद के पिता और भाई के नाम ही था। इसके साथ ही दूर के रिश्ते के भतीजे को भी 60 लाख रुपए से ज्यादा के ठेके दे दिए गए हैं। जबकि लोक निर्माण वित्तीय एवं लेखा नियमों के तहत उन लोगों को ऐसे ठेके नहीं दिए जा सकते हैं, जिनके रिश्तेदार, परिजन उस विभाग के मुखिया हों अथवा वहां काम करते हों।

सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्री का दूर के रिश्ते में भतीजा अजरुनलाल सैनी बोर्ड में पहले से ही ठेकेदारी कर रहा है। डेढ़ साल पहले बोर्ड में ही ठेकेदारी करने के लिए मंत्री के दामाद राकेश सैनी ने राकेश कंसट्रक्शन कंपनी के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया। ठेकेदारी का अनुभव नहीं होने के कारण राकेश का रजिस्ट्रेशन पहले डी क्लास ठेकेदार के रूप में किया गया है। इसके अलावा वह कुछ अन्य ठेकेदारों के साथ पार्टनरशिप में भी काम कर रहा है।

कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी इसे कतई गलत नहीं मानते। उनका कहना है कि मेरा रिश्तेदार है तो दलाली या गलत काम तो नहीं कर रहा है। खुली निविदा और प्रतिस्पर्धा में आकर छोटी-मोटी ठेकेदारी कर भी रहा है तो क्या गुनाह है? मंत्री हूं तो क्या मेरे रिश्तेदार या परिजन कमाकर नहीं खा सकते। वैसे दामाद को टेंडर दिलाने के लिए उन्होंने आज तक न तो किसी इंजीनियर को फोन किया है और न ही कहीं सिफारिश की है। दूसरे ठेकेदार अजरुनलाल सैनी के बारे में कृषि मंत्री का कहना है कि उससे उनका कोई रिश्ता नहीं है।

करीब एक करोड़ के काम दिए:
बोर्ड के इंजीनियरों ने मंत्री के दामाद और भतीजे को करीब एक करोड़ रुपए के टेंडर दिए हैं। इनमें टर्मिनल मार्केट में फुटपाथ निर्माण का 50.10 लाख रुपए और प्लांटेशन का काम 17.86 लाख रुपए का ठेका अजरुनलाल सैनी को दिया गया है। टर्मिनल मार्केट में ही लेबर शैड बनाने का 6 लाख रुपए का ठेका मंत्री के दामाद राकेश सैनी को दिया गया। इससे पहले फागी में ही खेत पर फार्म पाउंड बनाने का 10 लाख रुपए का काम उद्यान विभाग की स्कीम के तहत राकेश सैनी को ही दिया गया था। बोर्ड सूत्रों का कहना है कि राकेश सैनी इसके अलावा कुछ अन्य काम पार्टनरशिप में भी कर रहा है।

ऐसे मिलते हैं ठेके :
किसी भी काम का ठेका लेने के लिए ठेकेदारों में अक्सर पूलिंग सिस्टम चलता है। इसमें काम लेने वाला ठेकेदार अन्य ठेकेदारों से मिलकर टेंडर डालता है। पूलिंग सिस्टम के तहत डमी ठेकेदार बहुत ज्यादा दरों पर टेंडर डालते हैं और बाद में अपनी पूल की रकम लेकर संबंधित ठेकेदार को काम दिलवा देते हैं।

गैरवाजिब लाभ नहीं दिया
* कृषि मंत्री का दामाद डी श्रेणी का ठेकेदार है। ऐसे ठेकेदारों का पंजीयन एवं कार्यो के ठेके अधिशाषी अभियंता स्तर पर ही दिए जाते हैं। उनके दामाद को खुली निविदा में सबसे कम दरें आने पर ही ठेके दिए गए हैं। उसे गैरवाजिब लाभ कतई नहीं दिया गया है। नियमानुसार डी श्रेणी के ठेकेदार को एक्सईएन स्तर पर 15 लाख रुपए तक का काम देने का अधिकार है। जो भी काम दिया गया है वह नियमों के तहत ही दिया है। वैसे भी 16 लाख रुपए के टेंडर कोई ज्यादा नहीं है।
-विपिनचंद्र, प्रशासक राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड





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