भोपाल. अदालत के आदेश को प्रशासन कितनी लापरवाही से लेता है, इसका उदाहरण है- फर्जी पासपोर्ट मामला। अदालत के आदेश के चार महीने बाद भी लचर विवेचना और पर्याप्त साक्ष्य नहीं देने पर पुलिस अफसरों, नोटरी समेत आधा दर्जन लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।
फर्जी पासपोर्ट मामले की आरोपी मोनिका बेदी को 16 जुलाई को सीजेएम अजय श्रीवास्तव के न्यायालय ने बरी किया था। अपने आदेश में उन्होंने लिखा था कि मामले के विवचेना अधिकारी डीएसपी क्राइम जेपी पाली और उनके बाद डीएसपी सुरेंद्र शुक्ला ने अपने कत्र्तव्य के प्रति उपेक्षा एवं अनियमितता बरती है। यदि ऐसा नहीं होता, तो अपराधियों को दंडित किया जाना संभव हो सकता था।
इसके साथ ही नोटरी खलीलउल्ला खां, हवलदार इरफान अहमद, नगर निगम के सहायक खाद्य निरीक्षक उमाशंकर वर्मा, लिपिक अजीज फातिमा और पासपोर्ट अधिकारी अमर जीनस लकड़ा पर भी कार्रवाई करने के लिए कहा गया था।
मोनिका बेदी के मामले में जब पुलिस ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेणु शर्मा के यहां अपील की, तो उन्होंने भी निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया था। छह सितंबर को दिए गए इस आदेश में उन्होंने कहा कि सत्य को मृत्युकारित करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। अदालत के आदेश की कापी संबंधित विभागों को भेजी जाए और की गई कार्रवाई से अदालत को अवगत कराया जाए, लेकिन किसी भी विभाग ने ऐसा नहीं किया।
क्या हुआ अदालत के आदेश का:
इस मामले में तत्कालीन एसपी ने सेवानिवृत्त हो चुके डीएसपी जेपी पाली और वर्तमान में देवरी एसडीओपी सुरेंद्र शुक्ला को नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों के जवाब नहीं आए। हवलदार इरफान पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान एसपी जयदीप प्रसाद को इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश है, तो कार्रवाई होगी।
नगर निगम में भी आरोपी कर्मचारी अपने-अपने काम पर हैं। निगम कमिश्नर निकुंज श्रीवास्तव विदेश यात्रा पर हैं। उनके कार्यालय से बताया गया कि इस संबंध में अदालत का आदेश अभी निगम तक नहीं पहुंचा।
नोटरी खलीलउल्ला भी अपना काम कर रहे हैं। कलेक्टर आरके माथुर को इस विषय की जानकारी नहीं है। पासपोर्ट कार्यालय में पदस्थ अमरजीनस लकड़ा के बारे में पासपोर्ट अधिकारी आरए ढुणो कहते हैं कि इस तरह की कार्रवाई विदेश मंत्रालय ही कर सकता है।
वकील की मौजूदगी पर आपत्ति जताई
अबू सलेम से पूछताछ के दौरान उसके वकील के मौजूदगी को लेकर अभियोजन पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मामले में शुक्रवार को सीजेएम अजय श्रीवास्तव की अदालत में अभियोजन अधिकारी केएस कंसाना ने लंबी बहस की। सीजेएम ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आदेश के लिए शनिवार की तारीख तय की है।
काम की बात नहीं बोल रहा सलेम:
सात दिन के पुलिस रिमांड पर पुलिस को सौंपा गया माफिया सरगना अबू सलेम ऐसा कुछ नहीं बोल रहा, जो पुलिस के काम आए। वह ज्यादातर चुप रहता है। बोलता है, तो पुलिस को अंडरवल्र्ड की कहानियां सुनाता है।
उन्होंने आपत्ति करते हुए कहा कि पुलिस पूछताछ में सलेम के साथ वकील के मौजूद रहने की कोई जरूरत नहीं है। इसके पहले अबू सलेम के भांजे और वकील मोहम्मद राशिद ने अदालत में एक अर्जी पेश कर सलेम से मिलने की इजाजत मांगी थी।