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शिवराज की पीठ पर भाजपा का हाथ

भोपाल.shiv लोकायुक्त पुलिस में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के दूसरे दिन सत्ता व संगठन के गलियारों में खासी गहमा-गहमी रही। प्रदेश भाजपा कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री निवास और मंत्रियों के बंगले इसके केंद्र रहे। माहौल तब हल्का हुआ, जब भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूरी पार्टी के शिवराज सिंह चौहान के साथ होने का संदेश दे दिया।

ये हुआ भोपाल में
शुक्रवार का दिन भाजपा में डैमेज कंट्रोल की कवायद में गुजरा। पार्टी के राज्य मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और संगठन महामंत्री माखन सिंह की एकांत मंत्रणा हुई। दोपहर में दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री निवास पहुंच कर इस मसले पर श्री चौहान से लगभग डेढ़ घंटे तक चर्चा की। इसे शीर्ष नेताओं के बीच डैमेज कंट्रोल का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

चर्चा में यही लाइन तय हुई कि चौहान के साथ संगठन पूरी ताकत से खड़ा रहे। इसके अलावा लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के बंगलों पर लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर का तोड़ तलाशा जाता रहा। इस बीच शुक्रवार को श्री चौहान से कई महत्वपूर्ण नेताओं ने मुलाकात की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, मंत्री- हिम्मत कोठारी, श्री विजय वर्गीय, अखंडप्रताप सिंह व करण वर्मा प्रमुख हैं।

ये हुआ दिल्ली में
सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान ने इस मामले पर महासचिव और कानूनविद अरुण जेटली सहित अन्य विशेषज्ञों से चर्चा के बाद बचाव के साथ आक्रमण की रणनीति तय की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री तोमर ने बताया कि इस संबंध में आज ही नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी, अध्यक्ष राजनाथ सिंह, संगठन महामंत्री रामलाल से लेकर प्रभारी महासचिव अनंत कुमार से फोन पर चर्चा की गई।

इन सभी का कहना था कि मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है और शिवराज सहित राज्य सरकार की छवि भंग करने की इस साजिश का मुकाबला किया जाए। बकौल श्री तोमर इस संबंध में भाजपा संसदीय बोर्ड ने भी कहा है कि चौहान की ईमानदारी और निष्ठा पर कोई संदेह नहीं है। इसलिए यह लड़ाई राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर पूरी ताकत से लड़ी जाए। इसके लिए जरूरत पड़ने पर जनता के बीच जाने के साथ हाईकोर्ट भी जाएंगे।

मुख्यमंत्री का पलटवार कहा-
करोड़ों रु. डकारने वाले मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं
आरोपों का डटकर मुकाबला करुंगा
कांग्रेस का पूरा अभियान राजनीति से प्रेरित

पार्टी ने कहा इस्तीफा देने की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डंपर खरीदी के मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इस मसले पर इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि स्वयं केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने उनसे इस्तीफा न देने के लिए कहा है। श्री चौहान शुक्रवार को यहां अपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस राजनीतिक अभियान का मुकाबला करने के लिए वे मैदान में डटे रहेंगे। न देन्यम न पलायनम। उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि चार डंपर के अलावा कांग्रेस को अब तक कोई मुद्दा ही नहीं मिला। जमुनादेवी बार-बार दो करोड़ रुपए की बात करती हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि 72 लाख रुपए में से 65 लाख रु. का लोन टाटा फायनेंस से लिया था। बाकी 27 लाख मार्जिन मनी थी।

शिवराज लगा सकते हैं पुनरीक्षण याचिका
पता छुपाने संबंधी आरोपों का प्रतिवाद करते हुए श्री चौहान ने कहा कि स्थाई पते में भोपाल का पता लिखा है। इसमें कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी पर भरोसा ही नहीं है। पहले उसके नेता आयकर विभाग गए, फिर सुप्रीम कोर्ट गए।

श्री चौहान ने कहा कि वे डंके की चोट पर कहते हैं कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। तकलीफ इस की जरूर है कि ऐसे लोग भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं जो अरबों रुपए खा गए और डकार भी नहीं ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ईमानदारी से जीवन निर्वाह का साधन जुटाने के लिए कोई गलत काम नहीं किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने पार्टी से बात की है।

पार्टी ने कहा है कि डटकर मुकाबला करें, हम साथ हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग राजनीति को क्रिकेट का मैदान मानकर तीसरे विकेट के गिरने का इंतजार कर रहे हैं तो मैं यह विकेट तो गिरने नहीं दूंगा।





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