जोधपुर. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की डेजर्ट सर्किट डवलपमेंट स्कीम के तहत गत अप्रैल माह में पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर एवं बीकानेर जिलों
में डेजर्ट सफारी विकसित करने के लिए 8 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। यही नहीं ऑफ रूट पर आने वाले रेगिस्तान के बाड़मेर जिले को पहली बार इस सर्किट में शामिल किया गया ताकि इस क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकें। विभाग ने इन चार जिलों के प्रशासनिक और पर्यटन अधिकारियों से डेजर्ट सफारी के तहत नई साइट विकसित करने के प्रस्ताव मांगे थे। इसी के तहत विभाग ने यह प्रोजेक्ट बनाया है।
यहां बनेंगे वाच टॉवर
ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिले के गुढ़ा विश्नोइयां, काकांणी के हैवलाब तालाब एवं खींचन गांव में वाच टॉवर बनाने का प्रस्ताव हैं। प्रत्येक वाच टॉवर पर 7 लाख रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा वाच टॉवर के पास ही वनकर्मियों को आवासीय सुविधा मुहैया करवाई जाएगी, जिस पर 3 लाख व्यय किए जाएंगे।
वाच टॉवर और वनकर्मियों के आवासों में जल व विद्युत व्यवस्था पर 75 हजार, वाच टॉवर परिक्षेत्र के चारों ओर पक्की दीवार एवं प्रवेश द्वार पर 3 लाख रुपए तथा इन्हीं क्षेत्रों में मृदा का उपचार कर पौधरोपण किया जाएगा। जिस पर 1 लाख 95 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रोजेक्ट में इन स्थानों पर अन्य विकास कार्र्यो पर करीब 30 हजार रुपए खर्च होंगे। वाच टॉवर से सैलानियों को प्रकृति में विचरण करने वाले वन्यजीवों को करीब से निहारने, वनकर्मियों को वन क्षेत्रों एवं शिकारियों पर पैनी नजर रखने, वन्यजीवों की सुरक्षा व उनका संरक्षण तथा परिक्षेत्र में हरियाली फैलेगी।
तालाबों का होगा कायाकल्प
खेजड़ली, गुढ़ा विश्नोइयां, कांकाणी हैवलाब और खींचन तालाब को विकसित किया जाएगा। इसके तहत इन सभी तालाबों की भराव क्षमता का विस्तार, गहराई, लंबाई-चौड़ाई को बढ़ाना, तालाब की पाल के बिखराव को रोकने के लिए पाल के दोनों ओर पक्की दीवार का निर्माण, तालाब के जलग्रहण क्षेत्र का विकास एवं अपग्राही नालियों का निर्माण प्रस्तावित है। प्रोजेक्ट में खेजड़ली तालाब के लिए 15 लाख जबकि अन्य तीनों तालाबों के विकास के लिए 75 लाख रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। इससे पानी की आवक बढ़ेगी, तालाब में बारह महीने पानी रहेगा। ग्रामीणों एवं वन्यजीवों को पानी उपलब्ध होने के साथ विदेशी परिंदों का आवागमन होगा।
सालावास में बनेगा हैंडीक्राफ्ट मार्ट
सालावास और उसके आस-पास के गांवों में दरी, मिट्टी के बर्तन, गंधा बनाने एवं चमड़ा का कुटीर उद्योग घर-घर चल रहा है। इन उद्योगों से जुड़े हस्तशिल्पयों एवं उनकी कला को प्रोत्साहित करने के लिए सालावास में तीस लाख रुपए की लागत से हैंडीक्राफ्ट बाजार बनाना प्रस्तावित है। यहां इन हस्तशिल्पयों को एक छत के नीचे स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा। यहां आने वाले सैलानियों को अपने पसंद के उत्पाद खरीदने में आसानी रहेगी। हस्तशिल्पयों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
मिड-वे निखरेंगे
डेजर्ट सफारी के दौरान देशी-विदेशी सैलानियों को स्टे की बेहतर सुविधा मुहैया करवाने के लिए ओसियां, देचू और फलौदी में बने आरटीडीसी के मिड-वे को निखारा जाएगा। मिड-वे जनसुविधा, खान-पान की सुविधा एवं कमरों का नवीनीकरण किया जाएगा। तीनों मिड-वे के विकास के लिए 45 लाख रुपए खर्च करना प्रस्तावित है।
साइन बोर्ड
देशी-विदेशी सैलानियों को ग्रामीण जनजीवन, वाइल्ड लाइफ एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी देने के लिए डेजर्ट सफारी सर्किट क्षेत्र में साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर करीब 5 लाख रुपए प्रस्तावित किए जाएंगे।
* सूर्यनगरी में पिछले कुछ वर्र्षो से देशी-विदेशी सैलानियों का इजाफा हो रहा है। यहां आने वाले अधिकांश सैलानी ग्रामीण जनजीवन से रूबरू भी होते हैं। रूरल टूरिज्म को विकसित करने के उद्देश्य से ही डेजर्ट सफारी सर्किट डवलपमेंट स्कीम के तहत दो करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर पर्यटन मुख्यालय भेजा गया है। प्रोजेक्ट में वन क्षेत्रों में वाच टॉवर, तालाबों का विकास, सालावास में हैंडीक्राफ्ट मार्ट और आरटीडीसी के मिड-वे आदि के कार्य प्रस्तावित हैं। प्रोजेक्ट स्वीकृत होने पर जोधपुर जिले में टूरिज्म बढ़ने के साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
—उमरावसिंह राठौड़ उप निदेशक, पर्यटन विभाग जोधपुर