News
Rajasthan
Shekhawati Shekhawati सीकर. धन कमाने के लिए दुबई जाकर अवैध रूप से दूसरी कंपनियों में काम करने वाले शेखावाटी के श्रमिकों पर अब आफत आ गई है। सरकार ने ऐसे श्रमिकों को बाहर खदेड़ दिया है।
श्रमिकों को विदेश भेजने वाले एजेंटों के अनुसार दुबई की कई कंपनियों में यूनियनबाजी व अवैध रूप से दूसरी कंपनियों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को लेकर यूएई सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था। यूनियनबाजी कर आंदोलन में हिस्सा लेने वाले श्रमिकों पर कानूनी कार्रवाई भी की गई। सरकार ने बाद में अवैध रूप से काम करने वाले श्रमिकों को आम माफी देकर तीन नवंबर तक देश छोड़ने के लिए कहा था।
इस आदेश के बाद हजारों मजदूर वहां से देश छोड़कर भारत आ गए। इनमें शेखावाटी के भी हजारों श्रमिक इस आफत के बाद घर लौट आए हैं। वहीं हजारों की संख्या में शेखावाटी के ऐसे श्रमिक अभी भी दुबई में ही फंसे हैं और भारत लौटने की अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो वहां 15-15 साल से टिके हुए हैं और कानूनी कार्रवाई झेलने के बाद भी दुबई को नहीं छोड़ना चाहते हैं।
दुबई की तरफ रुझान कम हुआ : दुबई में पिछले काफी समय से चल रहे हालात व रुपए की मजबूती के कारण श्रमिकों का दुबई की तरफ रुझान कम हुआ है। एजेंटों का कहना है कि रुपए की मजबूती से पहले खाड़ी देशों में काम के लिए जाने वाले श्रमिकों को दस से 15 हजार रुपए बचते थे, लेकिन अब उनको आठ-सात हजार रुपए ही बच रहे हैं। इसके चलते श्रमिक वहां अवैध रूप से अन्य कंपनियों में भी काम करने को मजबूर हैं, जिससे श्रमिकों को देश छोड़ने का फरमान मिला है।
श्रमिकों के परिजन चिंतित : दुबई में सरकारी फरमान के बाद वहां फंसे शेखावाटी के श्रमिकों के परिजन भी चिंता में हैं। लगातार फोन के जरिए उनसे संपर्क कर रहे हैं। इन श्रमिकों के भी शीघ्र ही लौटने का इंतजार है।
* दुबई में अवैध रूप से काम करने वाले व आंदोलनों में भाग लेने वाले श्रमिकों को सरकार ने आम माफी दी थी और देश छोड़ने के लिए कहा था। तब से वहां श्रमिकों पर आफत आ गई। कुछ वापस लौट आए हैं और कुछ अभी फंसे हुए हैं। यूएई सरकार के कड़े रुख व रुपए की मजबूती के चलते श्रमिकों का दुबई की तरफ रुझान कम हुआ है।
—एम. मजीद प्रोपराईटर, एमके इंटरनेशनल
* *अवैध रूप से काम करने वाले श्रमिकों को दुबई से निकाल दिया गया है। शेखावाटी के कुछ श्रमिक लौट आए हैं और कुछ अभी आने वाले हैं, जिनकी संख्या हजारों में है। कुछ ऐसे भी हैं जो वापस आना नहीं चाहते।
—मोहनलाल महला, राज ट्रेवल्स