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जंगल की जमीन को खोद रहे हैं पत्थर माफिया

ग्वालियर. उत्तर घाटीगांव के जंगल में चल रहे अवैध पत्थर के कारोबार का सच आखिर वन विभाग ने उगल ही दिया। स्वीकृत खदानों में पत्थर नहीं निकलने के बाद भी शासन की रायल्टी रसीदें निरंतर काटी जा रही हैं। इसकी आड़ में प्रतिदिन बसौटा बैरियर से दो दर्जन से अधिक ट्रक पत्थर लेकर निकल रहे हैं।

जंगल के अधिकारियों ने जंगल की सुरक्षा के लिए वन चौकियां तो खोल दीं लेकिन उन पर कुछ ऐसे कर्मचारियों को तैनात कर डाला, जिन पर जांचें बैठी हुई हैं। यही वजह है कि जंगल अब सुरक्षित नहीं रहा है। 16 अक्टूबर को मोहना के नायब तहसीलदार, माइनिंग अधिकारी व सोन चिड़िया अभयारण्य क्षेत्र के रेंज आफिसर के दल ने जखौदा (उत्तर घाटीगांव) का दौरा किया था।

वे जाखौदा की नर्गिस बेगम पत्नी अब्दुल हमीद कादरी की खदान पर पहुंचा। वहां चेक करने पर पता चला कि एक से 15 अक्टूबर तक पत्थर नहीं निकाला गया। जबकि बसौटा बैेरियर से सात, आठ व 10 अक्टूबर को तीन अलग-अलग नम्बर के ट्रक निकले हैं।

यह बात सामने आने के बाद उत्तर घाटीगांव के रेंजर व एसडीओ ने ग्राम जखौदा की खदानों का निरीक्षण कराया। उसमें छह खदानें ऐसी और मिलीं जो फील्ड में बंद हैं लेकिन कागजों में तेजी से चल रही हैं। इसी आड़ में जंगल से पत्थर निकालकर बाजारों में बेचा जा रहा है।

सच्चाई सामने आने के बाद महकमे के अधिकारियों की आंखों पर बंधी पट्टियां खुल गईं। डीएफओ पुरुषोत्तम धीमान ने कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव को एक पत्र लिखकर गेंद उनके पाले में डाल दी है। कलेक्टर से उपरोक्त खदानों का फीड बैक के अन्तर्गत संयुक्त दल गठित करने के लिए कहा है।

इसके लिए डीएफओ ने आयुक्त द्वारा 30.12.2006 में लिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया है। उधर पत्थर कारोबार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वन विभाग की मिली भगत के चलते यह काम विगत दिनों से तेजी से फलफूल रहा है।

>> कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव को इस संबंध में डीओ लेटर लिखा था। उस पर अभी कुछ हुआ नहीं है। जरूरत पड़ी तो दोबारा पत्र लिखकर उक्त खदान संचालकों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
- पुरुषोत्तम धीमान, डीएफओ





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