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Chandigarh Chandigarh पटियाला/चंडीगढ़ पंजाबी यूनिवर्सिटी के वीसी स्वर्ण सिंह बोपाराए के इस्तीफे की शुक्रवार को चर्चा रही। हालांकि खुद उन्होंने इन खबरों को खारिज कर दिया, लेकिन माना जा रहा है कि वीसी ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मिलकर इस्तीफे की पेशकश की है। मुख्य सचिव आरआई सिंह व विजिलेंस विभाग के प्रमुख सुमेध सिंह सैणी ने भी वीसी के मुख्यमंत्री व राज्यपाल से मिलने की पुष्टि की है। वीसी ने इसे अनौपचारिक मुलाकात बताया है। वीसी के खिलाफ यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों की भर्ती में गड़बड़ी के मामले में राज्य सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हुए हैं।
उनके खिलाफ पीयू की ही जॉइंट एक्शन कमेटी की ओर से विजिलेंस को शिकायत भेजी गई थी। विजिलेंस के कुछ अधिकारी बुधवार को पीयू में उनसे पूछताछ करने पहुंचे थे। विजिलेंस तो पूछताछ कर लौट गई लेकिन इसके बाद से ही पीयू में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
बोपाराए को हटाने को लेकर शुरू से अकाली दल ने मोर्चा खोला हुआ था। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बोपाराए को वर्ष 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाबी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर लगाया था। बोपाराए अपने सख्त स्वभाव और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
मालवा के पिछड़े इलाकों में लोगों के सहयोग से खोले गए रीजनल सेंटरों के कारण ही यहां के विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के योग्य हुए हैं। इसके अलावा तलवंडी साबो में एनआरआई के सहयोग से ग्रामीणों के लिए बनाए गए यादविंदरा इंजीनियरिंग कॉलेज के कारण भी उनकी काफी प्रशंसा होती रही है लेकिन शिरोमणि अकाली दल के नेताओं के साथ उनकी पटरी नहीं बैठी। बोपराए ने यूनिवर्सिटी के मामलों में सरकारी दखल को बर्दाश्त न करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की हुई है।