नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी(एआईसीसी)में बतौर महासचिव अपने पहले भाषण में आदर्शवाद का पाठ पढ़ाते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी खुले विचारों वाले युवाओं की उम्मीदों के अनुसार बने और पार्टी में तरक्की का जरिया सिर्फ प्रदर्शन हो।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहे राहुल ने पार्टी महासचिव के रूप में पहली बार संबोधित करते हुए कहा कि मैं आज यहां खड़ा होकर हर युवा भारतीय से आग्रह करता हूं कि वह हमारे साथ शामिल हों और अपने सपनों, अपने मूल्यों और अपनी क्षमताओं के अनुरूप संस्थाओं के निर्माण में सहयोग दें।
इससे पहले बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मुझे यकीन है कि कांग्रेस के नौजवान नेता राहुल गांधी देश के नौजवानों के दिल और दिमाग को जीतकर कांग्रेस पार्टी को और भारत को एक नई मंजिल तक ले जाने में जरूर कामयाब रहेंगे। सिंह की इस भविष्यवाणी पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और राहुल की जय जयकार के नारों से गूंज उठा।
बैठक शुरू होते ही कमेटी की बैठक में सोनिया गांधी से पहले राहुल गांधी के पक्ष में नारे लगे। यही नहीं, मंच पर आगे से चौथी पंक्ति में बैठे राहुल को पहली पांत में बैठाने की बार बार मांग की जाती रही। बैठक शुरू होते ही मंच से बोलने वाले लगभग हर नेता ने राहुल का भावी शीर्ष नेता के रूप में उल्लेख किया। मंच से ही नहीं बल्कि बैठक में आए देश भर के प्रतिनिधि भी राहुल के पक्ष में बार-बार नारे लगाते रहे। बैठक में मौजूद लोग राहुल को ही सुनना चाहते थे और बीच-बीच में वह इसकी मांग भी करते रहे।
दोपहर करीब तीन बजे जब राहुल का इंतजार कर रहे कांग्रेसी समर्थकों के सब्र का बांध टूट गया, तो उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। संबोधन के लिए तैयार खड़ी उड़ीसा की एक महिला नेता को बोलने का मौका तक नहीं दिया गया। तब कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को दखल देना पड़ा और उन्होंने महिला नेता को बोलने देने का आग्रह किया। इसके बाद जाकर शोर थमा।
अगले वक्ता के रूप में राहुल का नाम पुकारे जाने पर सभी उपस्थित लोगों ने खड़े होकर उनके स्वागत में देर तक तालियां बजाई। भाषण शुरू करने से पहले माला पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंटकर उनका स्वागत किया गया। राहुल के आठ मिनट के संक्षिप्त भाषण में 18 बार तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट गूंजी।
राहुल ने कहा कि अगर हमें वाकई ऐसा संगठन बनना है जो हमारे देश के युवाओं का प्रतिनिधित्व करे और अगर हमें राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाले नेता विकसित करने हैं तो संगठन को खुला और प्रासंगिक बनाना होगा। तरक्की को प्रदर्शन से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि लोग भारत के नागरिकों को अलग-अलग निगाह से देखते हैं और उनका भी एक नजरिया है।
राहुल ने कहा कि अपने देशवासियों के बीच न मुझे धर्म, न वर्ग, न कोई और अंतर दिखता है। अगर मुझे अंतर दिखता है तो सिर्फ एक-वह मौके का अंतर है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में एक तरफ वे लोग हैं, जिन्हें देश के निर्माण में भाग लेने का मौका मिलता है। दूसरी तरफ वे लोग हैं जिन्हें इस प्रगति में हिस्सेदारी का मौका नहीं मिल पाता। यही अंतर मेरी राजनीतिक सोच में महत्व रखता है। राहुल ने कहा कि भारत की आम जनता ही हमारी सबसे कीमती संपत्ति है। उन्हीं के दिलों में वह परिवर्तन की ज्वाला है, जिसके बल पर देश का नवनिर्माण होगा।
उन्होंने कहा कि इस ज्वाला को आग में बदलने के लिए हमें भारत के गरीब और पिछड़े लोगों को देश और विश्व की अर्थव्यवस्था से संयोजित करना पड़ेगा। मैं समझता हूं कि यही हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी चुनौती है।