टीवी में बालों को लेकर जितने कॉमर्शियल्स आते हैं उससे कई गुना ज्यादा हेयर प्रोडक्ट्स मार्केट में मौजूद हैं। आखिर हों भी क्यों न, लोग सबसे ज्यादा सजग अपने बालों को लेकर ही रहते हैं। अब तक गंजे सिर या झड़तेबालों के लिए सबसे अच्छा सॉल्यूशन हेयर रिप्लेसमेंट सर्जरी ही माना जा रहा था। इसमें हेयर फॉलेकिल्स को छोटे-छोटे गुच्छों में सेट करके कम बालों वाली जगह पर रोपा जाता है, लेकिन हाल ही में लास वेगास में इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ हेयर रेस्टोरेशन सर्जरी कंवेशन में स्कैल्प ट्रांसप्लांट की बात सामने आई है।
उम्मीद की किरण ंबाल गिरने या गंजेपन से परेशान लोगों के लिए यह तकनीक उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2006 में हेयर रेस्टोरेशन की विभिन्न तकनीकों पर पूरी दुनिया में करीब 47 अरब रुपए खर्च किए गए। इसमें प्रूवन ड्रग्स जैसे प्रोपेशिया और रोगेन के अलावा ऑनलाइन बिकने वाले बाम और गंजेपन को दूर करने के लिए टीवी पर देर रात आने वाले कार्यक्रम भी शामिल थे। यूएसएटुडेडॉटकॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार फुल हेयर रिप्लेसमेंट सर्जरी की कीमत तकरीबन चार लाख रुपए है, जबकि प्रोपेशिया या रोगेन जैसी ड्रग्स का एक महीने का खर्च क्रमश: 2000 और ८क्क् रुपए आता है।
क्या हैं कारण
पुरुषों में गंजेपन का सबसे बड़ा कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन है। जिसमें यह हार्मोन जितना ज्यादा होता है उसके बाल उतने ही ज्यादा गिरते हैं जो अंतत: गंजेपन तक पहुंच सकते हैं। महिलाओं में गंजेपन के कई कारण हो सकते हैं। इसमें एनीमिया, दिमाग पर अत्यधिक दबाव पड़ना या फिर हार्मोनल बदलाव भी शामिल हैं।
जीन भी है वजह
हर वर्ष फॉर्मास्युटिकल और ड्रग कंपनियां नई-नई तकनीक पर लाखों डॉलर खर्च करती हैं। इसके बावजूद कुछ अनसुलझे पहलू आज भी हमारे सामने हैं। रशियन बायोलॉजिस्ट एवजेनी रोगायेव ने एक ऐसे जीन का पता लगाया है जिसका बालों से जुड़ाव हो सकता है। इस जीन के जरिए बालों की जड़ों में फमेर्ंट (खमीर) पैदा होता है। संभव है कि इस जीन से आगे चलकर बालों के बारे में ज्यादा रिसर्च आसान हो जाए।
विशेषज्ञों की राय
फेशियल ट्रांसप्लांट्स की मशहूर विशेषज्ञ मारिया सिमिनाउ भी इस नए शोध को लेकर काफी आशान्वित हैं। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर जानवरों पर यह शोध करके देखा है, लेकिन मानव जाति पर इसका टेस्ट होना अभी बाकी है। हेयर रेस्टोरेशन कांफ्रेंस में गंभीर रूप से जले या गंजे होने से ट्रॉमा में गए लोगों का भी ध्यान रखा गया है।
विरोधी भी कम नहीं
जहां विशेषज्ञ और गंजेपन के शिकार लाखों लोग इस तकनीक को आशा भरी नजरों से देख रहे हैं, वही कुछ विशेषज्ञ इसके परिणामों को लेकर खास उत्साही नहीं हैं। इन्हीं में से एक कनाडा के सर्जन डॉ. वेंस इलियट का कहना है कि रेस्टोरेशन ट्रांसप्लांट मुमकिन ही नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि इम्यून सिस्टम इस तकनीक को रिजेक्ट करता है। हम इसके लिए कितने ही प्रयास कर लें, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इसे स्वीकार नहीं कर सकेगा।
हेयर ट्रांसप्लांट के खतरे
आमतौर पर हेयर ट्रांसप्लांट्स सुरक्षित होते हैं, मगर कुछ मरीजों को इसके बाद काफी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी से पहले लोकल एनेस्थिसिया दिया जाता है। इससे कुछ मरीज तो फौरन उबर जाते हैं जबकि कुछ को पूरी तरह ठीक होने में एक हफ्ते तक का समय लग जाता है। यहां तक कि सर्जरी के बाद कुछ को जख्मों से ब्लीडिंग का भी अनुभव होता है। कुछ लोगों को तो सर्जरी सूट न होने या फिर सही न होने की स्थिति में दोबारा सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।
दुनिया पर नजर2006 में पूरे विश्व में हुए हेयर ट्रांसप्लांट्स तकरीबन 225,800
अमेरिका में 100,445,
ऑस्ट्रेलिया में 2394,
एशिया में 57,542,
यूरोप में 29,818 हेयर ट्रांसप्लांट्स हुए।
महिला-पुरुष अनुपात
2006 में हेयर रेस्टोरेशन कराने वाले
2 लाख 25 हजार 800 लोगों में से 86.2 फीसदी पुरुष थे और 11.4 फीसदी महिलाएं।