नई दिल्ली.
एनजीओज की मांग पर सरकार ने किशोर न्यायिक अधिनियम में कई महत्वपूर्ण संशोधन कर उसे और भी लचीला बना दिया है। संशोधित नियमानुसार अब बाल और किशोर अपराधियों को हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी, उन्हें हवालात में बंद नहीं किया जाएगा और पूछताछ के समय पुलिस उनके सामने वर्दी में नहीं आएगी।
नए नियम : >> बाल एवं किशोर अपराधियों को तीन साल से अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
>> सजा के बीच ही यदि वे वयस्क हो जाते हैं तो उन्हें सामान्य जेल में शिफ्ट किया जा सकता है।
>> दुष्कर्म, हत्या या बड़ों के साथ मिलकर किए अपराधों को छोड़कर किसी अन्य मामले में उनके खिलाफ एफआईआर या चार्जशीट दाखिल नहीं होगी।
>> पुलिस उन्हें हवालात में बंद नहीं कर सकती। गिरफ्तारी के तत्काल बाद पुलिस को निकटस्थ कि शोर न्यायालय बोर्ड या बाल कल्याण केंद्र में सूचना देनी होगी।
>> बाल व किशोर अपराधियों के लिए गिरफ्तारी, रिमांड, अभियुक्त, चार्जशीट, जांच, वारंट, समन, दोषी, कैदी, हिरासत, जेल जैसे आपराधिक और विरोधी शब्द पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। इनके स्थान पर वैकल्पिक मृदु शब्दों का उपयोग किया जाएगा।
>> सजा के दौरान भी उन्हें उच्च कैलोरी भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
>> राष्ट्रीय पर्व और अवकाश के दिन उन्हें मीठे पकवान दिए जाएंगे।
>> बाल व किशोर अपराधियों की रिहाई के वक्त उनकी यात्रा खर्च सरकार उठाएगी।
>> बाल व किशोर अपराध के मामलों का निपटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह होगा।
>> जिले में कम से कम एक किशोर न्यायिक बोर्ड, एक बाल कल्याण केंद्र और एक जिला बाल संरक्षण इकाई होगी।