लखनऊ. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत देश के कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों के अपहरण के इरादे से घूम रहे जैश-ए-मोहम्मद के तीनों आतंकियों ने लखनऊ में गिरफ्तारी के बाद अपनी नाकाम योजना का विस्तार से खुलासा किया है। शनिवार को इन आतंकियों को यहां कोर्ट में पेश किया गया, जहां गुस्साए वकीलों ने उन पर हमला बोल दिया। तीनों आतंकियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ऐसे होता अपहरण : गिरफ्तार आतंकवादियों में से एक यूसुफ उर्फ शफीकुर्रमान ने पुलिस गिरफ्त में मीडिया के सामने बताया कि उसके निशाने पर राहुल गांधी ही थे। एसपीजी के घेरे में रहने वाले राहुल आमतौर पर आम जनता से मिलने के लिए आगे आकर उनसे हाथ मिलाते हैं। आतंकी इसी मौके की फिराक में थे। युसुफ के अनुसार, उसे कहा गया था कि एक हथगोले का पिन निकालकर हाथ में रख लेना और फिर डरा-धमकाकर राहुल गांधी को दबोच लेना। इसके बाद चिल्लाकर बम फोड़ने की धमकी देते हुए और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को काबू में कर राहुल को खुले स्थान में ले जाना।
42 आतंकियों की लिस्ट : युसुफ ने बताया कि उन्हें ‘पाकिस्तान में बैठे आकाओं’ ने भारतीय जेलों में बंद 42 आतंकियों की लिस्ट दी थी, जिन्हें राहुल के बदले रिहा करवाया जाना था। उसने कहा कि उन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में प्रशिक्षण दिया गया था। पूरे ऑपरेशन में ओकासा नामक आतंकी को उनका मददगार बनाया गया था। राहुल को कहां से अगवा करना है, इस बात की जानकारी ओकासा से ही मिलनी थी। पिस्टल और हैंडग्रेनेड उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी उसी के हवाले थी। हालांकि तीनों आतंकी यह नहीं बता सके कि ओकासा स्थानीय निवासी है या बाहर का।
अपनी मांग ऐसे उठाते : अपहरण के बाद आतंकियों की यूएनओ के अलावा बीबीसी के दो संवाददाताओं को बीच में लाने की योजना थी, ताकि मामले को अंतरराष्ट्रीय रंग दिया जा सके। युसुफ ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें राहुल गांधी की वीडियो फिल्म भी दिखाई गई थी।
वकीलों का हमला : कड़ी सुरक्षा में सेशन कोर्ट लाए गए तीनों आतंकियों को देखते ही वकीलों ने हमला बोल दिया। आतंकियों की जान बचाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। तीनों को किसी तरह जज के चेंबर में लाया गया, लेकिन गुस्साए वकीलों ने वहां भी धावा बोलते हुए खिड़कियों के शीशे तोड़ डाले।