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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. शहर के तकरीबन सभी मोहल्लों और कालोनियों में हाथी पांव के मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 70 वार्डो में 2000 लोगों के खून के सैंपल मिले थे। इस नतीजे से हैरान विभाग बड़े पैमाने पर जांच की योजना बना रहा है।
स्वास्थ्य संचालक डा. प्रमोद सिंह ने बताया कि नगर निगम के सहयोग से शहर में फाइलेरिया नियंत्रण के लिए तीन दिवसीय अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान न सिर्फ लोगों को बीमारी से रोकथाम की टेबलेट दी गई, बल्कि शहर में इसके असर का परीक्षण करने के लिए रेंडम जांच की गई। इसके लिए 70 वार्डे को अलग-अलग जोन में बांटकर प्रत्येक वार्ड से ब्लड सैंपल लिए गए।
अभियान के तीसरे दिन ब्लड रिपोर्ट आने के बाद इस बात का पता चला कि शहर में फाइलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 2005 में फाइलेरिया नियंत्रण के लिए अभियान चलाया था।
उस दौरान शहर में केवल कुशालपुर और गुढ़ियारी की झुग्गी बस्ती में हाथीपांव के मरीजों का पता चला था। 2006 में अभियान नहीं चलाया गया। अब एक साल बाद जब अभियान चलाकर मरीजों की जांच की गई तो पूरी तस्वीर ही बदल गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बारे में कहते हैं कि फाइलेरिया का एक्शन प्लान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तय करता है। पिछले साल केंद्र से अभियान के संबंध में कोई निर्देश या सहायता नहीं दी गई थी। सेंट्रल का कार्यक्रम होने के कारण राज्य शासन सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता था।
महापौर सुनील सोनी और जिला मलेरिया अधिकारी ने दावा किया है कि राजधानी में 80 फीसदी लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित करने के लिए डीईसी की खुराक दी गई है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता और निगम का अमला घर-घर दस्तक देकर मरीजों की तलाश कर रहा है। महापौर ने आम लोगों से आग्रह किया है कि वे अनिवार्य रुप से डीईसी की खुराक लें।
खून की जांच आधी रात को
हाथी पांव की जांच करने का फामरूला भी कठिन है। फाइलेरिया की जांच रात 8.30 से 12 बजे के मध्य ही की जा सकती है। इस अवधि के अलावा खून की जांच करने पर फाइलेरिया के कीटाणु शरीर में है या नहीं इसका पता नहीं चलता।
फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डा. ओम कटारिया ने बताया कि फाइलेरिया के मच्छर काटने के फौरन बाद ही इसके कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। मच्छर काटने के बाद शुरु-शुरु में मामूली बुखार और सिर में दर्द की शिकायत होती है। उसके बाद 8-10 साल बाद अचानक पांव फूलने लगता है। इसलिए जरुरी यही है कि अभी से इसके बचाव और रोकथाम के उपाय किए जाएं।
क्या है फाइलेरिया
फाइलेरिया यानी हाथी पांव का असर जब शुरु होता है, तब सबसे पहले पैर के किसी हिस्से में छोटी से फुंसी होती है। फुंसी बढ़ने के साथ पैर में दर्द शुरु होता है और पांव फूलने लगता है। इस परिस्थति में पहुंचने के बाद कोई इलाज कारगर साबित नहीं होता। फाइलेरिया के मच्छर गंदगी में पैदा होते हैं। इसके लिए जरुरी है कि गंदे पानी और गंदगी जमा न होने दें। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए।