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वनवास पर विद्वानों की रुचि

रायपुर.ram दुर्ग के प्रोफेसर के रिसर्च पर देशभर के पुरात्तववेत्ताओं ने और जानकारी चाही है। भास्कर में समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रो. महेशचंद्र शर्मा को आधा दर्जन लोगों ने पत्र लिखा है। श्री शर्मा इस शोध को और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

श्री शर्मा के मेजर रिसर्च में श्री रामचंद्र के वनवास के प्रमाण मिले हैं। यह खबर 16 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में प्रमुखता से प्रकाशित की गई। जिसके बाद देश के कोने-कोने से लोगों की प्रतिक्रिया मिली।

श्री शर्मा को जयपुर के पुरातत्ववेत्ता कृष्ण स्वरुप वशिष्ठ ने पत्र लिखा है। वे आर्कियोलाजी सर्वे आफ इंडिया के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि लोग राम के अस्तित्व को नकारते हैं। ऐसे में यह शोध उनकी धारणा बदलेगा। उन्होंने श्री शर्मा के शोध के विषय में और जानने की इच्छा जताई है।

नोएडा (दिल्ली) से एसबीआई के मैनेजर व साहित्यकार राकेश राय ने शोध को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि इस शोध को और पुष्ट करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। जगदलपुर से से डा. बीएल झा ने भी श्री शर्मा को पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा है कि दक्षिण कोशल में काम के वनवास की जनश्रृतियां हैं। इसे लिपिबद्ध और प्रमाणित करना प्रशंसनीय है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग दिल्ली ने चार साल पहले डा. शर्मा को संस्कृत के विकास में छत्तीसगढ़ के योगदान पर मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपा था। इसके लिए 2.75 लाख रुपए भी दिए गए थे।

चार साल की मेहनत से डा. शर्मा ने 250 पृष्ठों का मेगा प्रोजेक्ट तैयार कर यूजीसी को भेजा है। इसमें 100 से ज्यादा फोटोग्राफ व तीन नक्शे शामिल हैं। 50 से ज्यादा विद्वानों से साक्षात्कार कर कई नए तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। डा. शर्मा का दावा है कि छत्तीसगढ़ में राम के जीवन से जुड़े कई अकाट्य प्रमाण हैं।





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