भोपाल. राजधानी में झुग्गियों में रहने वाली 78 प्रतिशत आबादी के पास शौचालय की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा वे खुले में शौच करते हैं। घर के लिए पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं पर निर्भर है। 85 प्रतिशत मामलों में महिलाएं ही पानी जुटाती हैं। यह तथ्य यूएन हैबीटेट, वाटर एड व नगर निगम द्वारा कराए एक सर्वे में सामने आए हैं।
पेयजल व शौचालय की उपलब्धता को लेकर यह सर्वे 17 झुग्गी बस्तियों के पांच हजार 33 लोगों के बीच किया गया था। इसके काफी चिंताजनक परिणाम आए हैं। अधिकतर झुग्गीवासियों को नित्यकर्म से निवृत्त होने के लिए घर से दूर जाना होता है।
केवल 11 प्रतिशत लोगों को घर के आसपास इसकी सुविधा उपलब्ध है। 77 प्रतिशत लोगों का कहना था कि इसके कारण उनके आसपास का वातावरण गंदा होता है। 19 फीसदी लोगों ने पेट की बीमारी व 15 प्रतिशत लोगों ने डायरिया की शिकायत की। छह फीसदी लोग ऐसे थे, जिन्होंने इसके कारण उनकी निजता समाप्त होने की बात कही।
पानी के लिए जद्दोजहद
पानी के लिए भी लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। सर्वे के अनुसार इन लोगों में से 57 प्रतिशत को पानी भरने के लिए आधे घंटे से भी कम समय मिल पाता है। पानी लाने के लिए अन्य परेशानियां भी हैं। 77 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वे पानी भरते समय असुरक्षित महसूस करती हैं। पानी के लिए लंबी लाइन से भी समस्या होती है। 65 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें इसमें काफी समय बर्बाद करना पड़ता है।
सार्वजनिक शौचालयों की हालत खराब
देश भर में सार्वजनिक शौचालयों की हालत खराब है। मध्य प्रदेश में 70 फीसदी आबादी को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके कारण उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। जनसंख्या बढ़ने के कारण उसमें और समस्या पेश आ रही है। यह बातें शनिवार को वाटर एड संस्था द्वारा ‘विश्व शौचालय दिवस’ के अवसर पर ‘मीडिया से विमर्श’ कार्यशाला के दौरान सामने र्आई।
कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 60 साल बाद भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं। अनेक मामलों में सरकार असफल हो गई है, तो प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप का कांसेप्ट सामने आया है।
कार्यशाला में मौजूद मीडिया के प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किए। कार्यशाला में दैनिक भास्कर के संपादक, मध्य प्रदेश अभिलाष खांडेकर, वाटर एड की क्षेत्रीय प्रबंधक ममिता बोरा ठक्कर सहित अनेक लोग उपस्थित थे।