भोपाल. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर 14 साल पहले भोपाल में स्थापित पीएसएस सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजूकेशन की साख कठघरे में है। संस्थान की स्टाफ एसोसिएशन द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुनसिंह को इस संबंध में लिखे गए एक पत्र के बाद श्री सिंह के मंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। संस्थान के एडवाइजरी बोर्ड ने भी मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की है।
एक साल के ही भीतर दूसरी बार इस संस्थान की जांच की नौबत आई है। नेशनल कौंसिल ऑफ एजूकेशन, रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के तहत संचालित देश का यह एकमात्र संस्थान है, जिसे 1986 की शिक्षा नीति के व्यावसायिक शिक्षा के एजेंडे को पूरा करने के मकसद से यहां स्थापित किया गया था।
1993 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुनसिंह ने इस संस्थान को भोपाल लाने में विशेष रुचि ली थी। लेकिन अब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑॅफ टेक्नॉलॉजी (मेनिट) के विवादों के बाद यह दूसरा संस्थान है, जिसके अंदरूनी विवादों के चलते केंद्र ने सख्त रवैया अपनाया है।
सूत्रों के अनुसार पिछले एक साल से संस्थान की स्टाफ एसोसिएशन ने मौजूदा संयुक्त निदेशक प्रो. आरजी चौकसे के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है और उन्हें एनसीईआरटी के हित में फौरन हटाने की मांग की जा रही है।
मानव संसाधन विकास मंत्री श्री सिंह और एनसीईआरटी के निदेशक कृष्णकुमार समेत मंत्रालय और एनसीईआरटी के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे पत्र में स्टाफ ने मांग की है कि संस्थान के क्रियाकलापों की उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए। आरोप है कि सुनियोजित ढंग से संस्थान की साख को चौपट किया जा रहा है।
इंक्वायरी कमेटी का नाम बदला
सूत्रों के अनुसार संस्थान की खराब होती छवि को देखते हुए मंत्रालय के आदेश से गत जनवरी में एनसीईआरटी ने दो सदस्यीय समिति को भोपाल भेजा था। इसमें डीन डॉ. डीके भट्टाचार्य और पूर्व जेडी डॉ. पूरनचंद शामिल थे।
फरवरी में की गई पड़ताल के बाद इस समिति ने अपनी रिपोर्ट एनसीईआरटी को सौंपी। लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो स्टाफ फैकल्टीज ने पुन: मंत्रालय को बिगड़ती स्थितियों से वाकिफ कराया। इसके बाद मंत्रालय के आदेश से एनसीईआरटी ने अक्टूबर में फिर से जांच के आदेश दिए, लेकिन ‘इंक्वायरी कमेटी’ का नाम बदलकर ‘फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ कर दिया गया।
स्टाफ एसोसिएशन ने इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए मंत्रालय से मांग की है कि दूसरी पड़ताल के दौरान जेडी को अवकाश पर भेजा जाए। दूरभाष पर दैनिक-भास्कर की कई कोशिशों के बाद भी एनसीईआरटी के निदेशक कृष्णकुमार इस विषय पर बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं हुए।
आरोपों की बानगी
संस्थान को एनसीईआरटी के मूल उद्देश्यों से भटकाया, स्थानीय नेतृत्व दिशाहीन।
महिला स्टाफ को शनिवार, रविवार और असमय दफ्तर में धमकियां देकर बुलाया जा रहा है।
अवकाश के दिनों में सीनियर स्टाफ के कम्प्यूटरों की होती है चोरी-छिपे पड़ताल।
वोकेशनल एजूकेशन के दूसरों के तैयार प्रोजेक्ट को अपने नाम से छपवा लिया।
तीस साल के केरियर में अब तक बेदाग रहे अधिकारियों को अकारण थमाए जा रहे हैं मेमो।
डेढ़ साल में हुए कार्यक्रमों में मनमाने ढंग से जेडी के करीबियों को उपकृत किया गया।
देश भर में हुए टूर प्रोग्रामों की जांच जरूरी।