जोधपुर. किसी हादसे में आधा पांव गंवा चुके लाखों लोगों को फिर से दौड़ने के काबिल बनाने वाला ‘जयपुर फुट’ अब और ज्यादा उपयोगी बनने जा रहा है। इस बार उम्मीद की यह किरण उन लोगों के लिए जगी है जो अपने पांव घुटने से ऊपर तक गंवा चुके हैं। अब जयपुर फुट जांघ तक अपंग लोगों को भी लग सकेगा। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति ने अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ जयपुर फुट को और अधिक उपयोगी बनाने का करार किया है। समिति के फाउंडर और सेबी के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र राज मेहता ने बताया कि उनके मित्र और अमेरिकी वैज्ञानिक अरमंड न्यूकामंस के प्रयासों से यह संभव हुआ है।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ चुके विश्व के जाने-माने वैज्ञानिक अरमंड ने इस वर्ष जनवरी में यूनिवर्सिटी के वाइस डीन डॉ.क्लीनबर्ग से मेहता की मुलाकात करवाई थी। दोनों के बीच जयपुर फुट पर काफी विस्तार से चर्चा हुई और मेहता ने डॉ.बर्ग को जयपुर फुट से संबंधित लिटरेचर भी दिया। अगस्त में जब मेहता फिर न्यूयार्क गए, तो डॉ.बर्ग ने जयपुर फुट को उपयोगी बनाने के संबंध में रिसर्च की इच्छा जाहिर की थी। भगवान महावीर विकलांग समिति के साथ स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम न केवल जयपुर फुट की क्वालिटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि इसे अधिक किफायती बनाने की भी कोशिश करेगी।
जयपुर फुट की खूबियां
घुटने से नीचे कटे पैर वालों को चलाने में जयपुर फुट का कोई सानी नहीं है। अमेरिका में जहां फुट रिप्लेसमेंट के लिए लगभग 50 हजार डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, वहीं जयपुर फुट केवल 1400-1500 रुपए में ही लग जाता है। जयपुर फुट लगाने के बाद व्यक्ति सामान्य मनुष्य की तरह 4 मिनट में एक किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। चलने के दौरान उसे महसूस ही नहीं होता कि उसे नकली पैर लगा हुआ है। अब तक करीब साढ़े तीन लाख लोगों को जयपुर फुट का फायदा मिल चुका है। पूरी तरह वाटरप्रूफ जयपुर फुट की सामान्य उम्र तीन साल है।
क्या होगा फायदा
नए करार के बाद अब घुटनों के जोड़ और घुटनों से ऊपर कटे पैर के संबंध में शोध होगा। जयपुर फुट का निचला हिस्सा तो बेहतर है, लेकिन जोड़ में तकनीकी कमी की वजह से डग भरते समय पैर की लिफ्ट दिखाई देती है। अब स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर और वैज्ञानिक न केवल इस लिफ्ट को दूर करने के प्रयास करेंगे, बल्कि नी-रिप्लेसमेंट को भी सरल बनाएंगे।
जनवरी में शुरू होगा काम
जोधपुर निवासी मेहता के अनुसार स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम जनवरी, 2008 में काम करना शुरू कर देगी। एक- दो महीने में फुटटाइज तैयार कर उसका ट्रायल किया जाएगा। छह लोगों की इस टीम में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से डॉ.क्लीनबर्ग के अलावा नी प्लेसमेंट सर्जरी विशेषज्ञ डॉ.यॉर्क और डॉ.अंदराची शामिल होंगे। इनके अलावा भगवान महावीर विकलांग समिति के एंबेसेडर डॉ.अरमंड न्यूकामंस, जोधपुर से डॉ.एम.के.माथुर और नई दिल्ली के डॉ. तरुण कुलश्रेष्ठ शामिल होंगे।
* इस करार के बाद नी ज्वाइंट के क्षेत्र में और काम हो सकेगा, ताकि जांघ से विकलांग व्यक्ति भी सामान्य व्यक्ति की तरह दौड़ सके।
—डीआर मेहता, फाउंडर और चीफ पेटर्न, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति