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Chhattisgarh
Raipur Raipur बीजापुर.
नक्सलियों ने सोमवार को ग्राम मुसालूर में सलवा जुड़ूम आंदोलन के मुखिया और कांग्रेस नेता बुधराम राणा और उनके बेटे कमलेश की हत्या कर दी। यह पहला मौका है, जब नक्सलियों ने सलवा जुड़ूम आंदोलन से जुड़े किसी बड़े नेता को मारा है। हत्या की खबर मिलते ही बीजापुर, कोंटा समेत आसपास के पूरे इलाके की दुकानें स्वस्फूर्त बंद हो गईं।
महेंद्र कर्मा के करीबी बुधराम राणा (48) बीजापुर मंडी के भी अध्यक्ष थे। सलवा जुड़ूम आंदोलन से शुरू से जुड़े राणा नक्सलियों की हिट लिस्ट में शीर्षक्रम पर थे। राणा सुबह 9 बजे अपने बेटे कमलेश (20) के साथ मोटरसाइकिल से 14 किमी दूर अपने पैतृक गांव मुसालूर गए थे। घर पहुंचते ही उनकी पत्नी भानबती ने गांव के पास नक्सलियों की मौजूदगी की खबर दी। पिता-पुत्र तुरंत घर से निकल गए।
इसी बीच नक्सलियों को भी उनके गांव आने की खबर मिल गई। गांव के पास ही नक्सलियों ने उनको घेर लिया और फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली उनके पैर में लगी। लंगड़ाते हुए वे जान बचाने के लिए दौड़े, लेकिन दूसरी गोली उनकी पीठ पर लगी और सीने से पार हो गई। नक्सली तब तक उनके पास पहुंच गए और उन्होंने जमीन पर गिरे बुधराम के सीने पर एक और गोली दाग दी।
मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। नक्सलियों ने भागने की कोशिश कर रहे कमलेश को भी दबोच लिया और धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी। इसके बाद नक्सली राणा की मोटरसाइकिल लेकर चले गए। वारदात के कुछ घंटे पहले नक्सलियों ने मुसालूर के पास पुल के निर्माण में लगे एक ट्रक को आग लगा दी थी। आगजनी की खबर मिलते ही बुधराम की पत्नी भानबती ने खतरा भांपते हुए गांव में रहने वाले अपने तीन बेटों और दोनों देवरों को घर से भगा दिया था।
बस्तर रेंज के आईजी आरके विज ने बताया कि हमला करने वाले नक्सलियों की संख्या कितनी थी, यह साफ नहीं है। एक हजार या उससे ज्यादा संख्या होने की पुलिस को सूचना नहीं है। बुधराम पर चलाई गईं पहली दोनों गोलियां भरमार बंदूक से चलाई गई थीं।
नक्सलियों की हिट लिस्ट में शामिल होने के कारण उनको बीजापुर में सरकारी आवास और हथियारबंद सुरक्षा गार्ड दिए गए थे। वे अक्सर गार्ड के साथ ही घर से बाहर निकले थे। श्री विज ने बताया कि सोमवार को भी वह चैतालूर मंदिर जाने की सूचना देकर बेटे के साथ बीजापुर से निकले थे।
बीजापुर, कोंटा बंद
राणा और उनके बेटे की हत्या की सूचना मिलते ही बीजापुर में सारी दुकानें धड़ाधड़ बंद हो गईं। कोंटा, भैरमगढ़, नैमेड़, आवापल्ली, कुटरू, मद्देड़, भोपालपटनम, फरसेगढ़ में भी यही हाल था। बीजापुर के सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज प्रभावित रहा। बुधराम और उनके बेटे का अंतिम संस्कार सोमवार शाम गांव में किया गया। इसमें बीजापुर के लोगों के अलावा यहां के सलवा जुड़ूम शिविर में रहने वाले ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
छह सौ से ज्यादा मौतें
करीब ढाई साल पहले दक्षिण बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ शुरू हुए सलवा जुड़ूम आंदोलन में अब तक 603 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें नगा बटालियन, पुलिस और एसपीओ को मिलाकर सुरक्षा बलों के 111 जवान शहीद हो चुके हैं।
यह आंकड़ा कुल मौतों का एक चौथाई है। बाकी तीन चौथाई सामान्य ग्रामीण या सलवा जुड़ूम आंदोलन से जुड़े लोग हैं। गत अगस्त 2005 में नक्सलियों ने गंगालूर मार्ग पर जिला पंचायत सदस्य विजय गिरि का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी थी।