भोपाल. पिछले साल भोपाल में आई बाढ़ के कारणों की पड़ताल और मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट, दिल्ली ने इसका चयन अकादमिक अध्ययन के लिए किया है। यह अध्ययन राजधानी सहित देश के आठ शहरों में होगा।
शहरी क्षेत्रों में बाढ़ और उसके प्रबंधन के लिए अध्ययन के बाद विभिन्न पहलुओं को दृष्टिगत रखते हुए प्लान बनाया जाएगा। भोपाल में इस अध्ययन का जिम्मा झील संरक्षण प्राधिकरण (एलसीए) को सौंपा गया है। अध्ययन में बाढ़ के कारण और उसके निवारण की पड़ताल की जाएगी। इसके लिए पिछले सालों में भोपाल में हुई बारिश के आंकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं।
चंद घंटों की तेज बारिश में 14 अगस्त 2006 को राजधानी में आई बाढ़ से करीब दो दर्जन लोगों की मौत हुई थी। शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए थे और करोड़ों रुपए की संपत्ति बर्बाद हो गई थी। भोपाल के अलावा जिन शहरों को इसमें शामिल किया गया है, उनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंैगलूरू, हैदराबाद, दिल्ली और सूरत शामिल हैं। अध्ययन को जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसकी शुरुआत भी हो गई है।
किन बिंदुओं पर होगा अध्ययन :
आमतौर पर मुंबई और चेन्नई में बारिश के बाद अनेक स्थानों पर कई बार बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, लेकिन पिछले साल भोपाल में आई बाढ़ से मची तबाही लोगों को आश्चर्य में डाल देने वाली घटना थी। भोपाल की भौगोलिक स्थिति समतल नहीं है और यहां मुंबई की तरह पानी नहीं रुकता है। इसलिए भोपाल को भी अध्ययन में शामिल किया गया है।
अध्ययन के लिए नियुक्त किए गए टीम लीडर झील संरक्षण प्राधिकरण के संयुक्त संचालक डा. संजीव सचदेव ने बताया कि भोपाल में औसत वर्षा का आंकड़ा 1086 मिमी है, जो पूरे सीजन का है। शुरुआत में यह तथ्य सामने आया कि अगर इतना पानी चार-पांच दिनों में बरस जाए, तो निश्चित ही बाढ़ जैसे हालत निर्मित हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि 1970 में भी भोपाल में काफी वर्षा हुई थी, तब भी पिछले वर्ष जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई थी। बाढ़ को रोकने के लिए शहर के नालों की क्षमता और जल निकासी के पैटर्न का अध्ययन होगा।
इस बात की पड़ताल की जाएगी कि तेज बारिश होने से कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे और यहां नुकसान होने का कारण क्या था। यहां जमीन का स्तर, ढलान, जल निकासी की व्यवस्था आदि बिंदुओं पर अध्ययन किया जाएगा और इसका प्रबंधन किया जाएगा।
>> मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पानी बरसने पर हमेशा समस्या पैदा होती है। भोपाल में ऐसे हालत कभी कभार ही बने हैं, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है। पिछले साल आई बाढ़ के कारण यहां काफी नुकसान हुआ था और बाढ़ प्रबंधन का प्लान तैयार करने की यहां जरूरत लगी। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट ने शहर का चयन ऐकेडमिक स्टडी के लिए किया है।
डा. संजीव सचदेव, संयुक्त संचालक, एलसीए