भोपाल. दीपावली के बाद मनने वाली देव उठनी ग्यारस तिथि 20 और 21 नवंबर को रहने से लोगों में दुविधापूर्ण स्थिति निर्मित हो गई है। शहर के ज्यादातर पंडितों का कहना है कि मंगलवार को स्मार्त संप्रदाय व बुधवार को वैष्णव संप्रदाय के लोगों को ग्यारस मनानी चाहिए। ज्यादातर पंचांगों में तुलसी विवाह की तिथि 21 नवंबर दर्ज है। इसी दिन से विवाह मुहूर्त भी शुरू होंगे।
पंडितों के अनुसार नवमी तिथि सोमवार की सुबह 8.56 बजे तक थी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हुई, जो मंगलवार की सुबह सात बजकर 21 मिनट तक रहेगी। तत्पश्चात ग्यारस शुरू होगी, जो अगले दिन बुधवार की सुबह साढ़े पांच बजे तक रहेगी।
पं. भंवरलाल शर्मा का कहना है कि पुराणों के अनुसार ग्यारस का दशमी के साथ होने पर द्वादश तिथि के साथ मनाना उत्तम होता है। उन्होंने बताया कि तुलसी विवाह भी बुधवार को ही होंगे। पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि मंगलवार को देव उठनी ग्यारस स्मार्त संप्रदाय, जबकि बुधवार को वैष्णव संप्रदाय के लोगों मनानी चाहिए।
अधिकांश पंचांगों में बुध को ग्यारस :
देश के कई पंचांगों में प्रबोधिनी एकादशी बुधवार को होने का उल्लेख है। बनारस के चिंताहरण, जबलपुर के भुवन विजय, लोक विजय व उज्जैन के भी कई पंचांगों में वैष्णवों के लिए बुधवार को ग्यारस होना बताया गया है।
श्री पंड्या का कहना है कि देव उठनी ग्यारस पर गन्ने (साटों) का मंडप बनाकर उसमें भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान कर पूजा करनी चाहिए। पूजा में आंवला, बैर, सिंगाड़े, सीताफल समेत नई कच्ची सब्जी चढ़ानी चाहिए।
उठो देव सांवरे..
मान्यता है कि इस दिन पूजा के बाद अविवाहित युवक-युवतियों को शीघ्र विवाह की प्रार्थना करते हुए मंडप के फेरे लगाने चाहिए। फेरे लगाते हुए वे यह कहें कि-
उठो देव सांवरे, बैर भाजी आंवरे,
क्वारन के ब्याह होए, ब्याहन के गौना।