इंदौर. पायोनियर इस्टिट्यूट में एमबीएके छात्र दुर्गेश शुक्ला की मौत (आत्महत्या) की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट सोमवार को हाई कोर्ट में पेश की गई। तीन महीने चली तीन अलग-अलग जांचों में कोई भी छात्र रैगिंग की पुष्टि करने नहीं आया। इसे मुद्दा बनाने वाले संगठनों में से भी किसी ने बयान नहीं दिया।
हालांकि जांच में कई बातें सामने आई हैं। 18 सिंतबर को दुर्गेश के शव के पास मिले सुसाइड नोट में रैगिंग का जिक्र था। तब हाई कोर्ट ने स्वप्रेरणा से संज्ञान लेते हुए कलेक्टर, एसपी और कॉलेज प्रबंधन को नोटिस दिए थे।
सूत्रों के अनुसार मजिस्ट्रियल जांच में जिन छात्रों से एसडीएम अजीत श्रीवास्तव ने पूछताछ की वे रैगिंग को लेकर कुछ नहीं बोले। उनके तीन बार बयान लिए गए। पुलिस और कॉलेज प्रबंधन के बयानों में तो वीडियोग्राफी करवाई गई लेकिन मजिस्ट्रियल जांच में गोपनीयता बनाए रखने के लिए नहीं।
जांच के निष्कर्ष में कहा गया है रैगिंग हुई है या नहीं? कहा नहीं जा सकता मगर इसकी पुष्टि नहीं हुई। यह बात जरूर सामने आई कि दुर्गेश अतिसंवेदनशील था। वह हर मामले को गंभीरता से लेता था मगर उसकी मौत का कोई दूसरा कारण भी नहीं निकला। श्री श्रीवास्तव ने बताया जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट भेज दी है।