News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी.
शिवपुरी में मिले आठ तांत्रिक मठ
पुरातत्व विभाग की टीम ने शिवपुरी जिले के तैरही गांव में जहां आठ तांत्रिक मठों की खोज की है, वहीं इन मठों में मिलीं नौवीं शताब्दी की कलाकृतियां पुरुष और प्रकृति के शाश्वत प्रेम को दर्शाती हैं। यह कलाकृतियां कई मायने में खजुराहो की ‘कला’ से भी बेहतर है।
आदिकाल से ही ‘काम’ सृजनशीलता का प्रतीक रहा है। खजुराहो की मैथुनरत प्रतिमाएं इसका प्रतीक हैं मगर शिवपुरी जिला मुख्यालय से साठ किलोमीटर दूर स्थित तैरही गांव में बुरी आत्माएं प्रेमालाप करती नजर आती हैं।
भोपाल पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एलपी पाण्डेय और गूजरी महल संग्रहालयाध्यक्ष एलबी सिंह की टीम ने तैरही ग्राम में भूत-भूतनियों के प्रेमालाप और उनके अंतरंग संबंधों को दर्शाती प्रतिमाएं खोजी हैं।
तैरही मठ का निर्माण 1100 वर्ष पहले किया गया था। पुरातत्वविदों का मानना है कि मठ में शैव-मयूर सम्प्रदाय के लोग रहा करते थे। यह सम्प्रदाय तंत्र पर आधारित है, जो भूत-प्रेतों के अस्तित्व को मानता था।
विभाग की रपट के अनुसार तैरही गांव में खुखई के पांच मठ हैं। इनमें बुरी आत्माओं को आलिंगनबद्ध दर्शाया गया था। पुरातत्ववेत्ता एलबी सिंह बताते है कि ग्वालियर अंचल में पहली बार तंत्र और अघोर विद्या के मठ मिले हैं । तैरही ग्राम तंत्र की कर्मस्थली रही है।
वे बताते हैं कि देश में अभी तक तंत्र साधना के ऐसे स्थल कहीं नहीं मिले हैं। इन मठों में तंत्र की 16 विद्याओं को भी अंकित किया गया है। साथ ही 33 अस्थिखण्ड को भी दर्शाया गया है। इसमें बताया गया है कि जहां राजयोग समाप्त होता है, वहीं से तंत्र की उत्पत्ति होती है। इन मठों के बाद ही जबलपुर में चौसठ योगिनी मंदिर बनाया गया था।
विभाग के डिप्टी डायरेक्टर भोपाल एलपी पाण्डेय ने बताया कि पिछले एक वर्ष से तांत्रिक मठ को खोज रहे थे। इस दौरान शिवपुरी जिले में पुरासंपदाओं की खोज के दौरान यह सफलता मिली। उन्होंने माना कि देश में पहली बार भूत-प्रेतों की प्रेम क्रीड़ाएं करती प्रतिमाएं मिली हैं, जो शोध का विषय भी है।
>> ग्वालियर अंचल में पहली बार प्रतिहार काल के 8 तांत्रिक मठ तैरही गांव में मिले हैं। 9 वीं सदी के इन मठों में कलाकारों द्वारा भूत और प्रेतों को प्रेम करते हुए दर्शाया गया है। यह कृतियां खजुराहो की प्रतिमाओं को भी मात दे रही हैं। भूत होते हैं तभी तो कलाकार ने चित्रित किया है।
—लाल बहादुर सिंह गूजरी महल संग्रहालयाध्यक्ष
आत्माएं भी करती हैं प्रेम
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि इतिहास में घटित घटनाओं को झुठलाया नही जा सकता है। प्राचीन काल में कलाकार समाज में घटित होने वालीं घटनाओं को पत्थर पर उकेरता था। प्राचीन काल में तैरही तंत्र विद्या का प्रमुख केंद्र रहा होगा।
प्रकृति के प्रति व्यक्ति के प्रेम को दर्शाने वालीं प्रतिमाएं तो कई जगह मिल जाएंगी, लेकिन भूत -प्रेतों के प्रलाप और प्रेमालाप करती प्रतिमाएं पहली बार तैरही गांव से प्राप्त हुई हैं। प्रतिमाओं से संकेत मिलता है कि तांत्रिक मठों में स्वच्छंद यौनाचार था तथा मरने के बाद भी प्रेमालाप होता था। यहां तक कि हड्डियां गलने के बाद भी प्रतीकों को प्रेम करते दिखाया गया है।