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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. तुलसी विवाह के दिन प्रबोधिनी देवउठनी एकादशी पर भारतीय ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण घटना घटेगी, जब देवगुरु यानी बृहस्पति का 12 वर्षो बाद अपनी धनु राशि में प्रवेश होगा। ज्योतिष विज्ञान कहता है कि गुरु की ‘घरवापसी’ तकरीबन सभी ग्रहों के लिए शुभ होगी। चातुर्मास की समाप्ति के साथ ही इस दिन से शादी-ब्याह व मांगलिक कार्यो की शुरुआत हो जाएगी।
वर्षो बाद 21 नवंबर को ऐसा संयोग बन रहा है, जो विशेषकर धनु और मिथुन राशि के जातकों के लिए खुशखबरी लेकर आएगा। देवउठनी एकादशी के दिन गुरु का अपनी धनु राशि में प्रवेश खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से एक विलक्षण घटना होगी। भारतीय ज्योतिष में गुरु को विवाह एवं मांगलिक घटनाओं का कारक माना जाता है।
21 नवंबर की रात 3 बजकर 22 मिनट पर गुरु वृश्चिक राशि छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करेगा और यह स्थिति 9 दिसंबर तक बनी रहेगी। इस दौरान गुरु धनु राशि में गोचर करेगा। ज्योतिष एवं वास्तुविद् पं. दीपक शर्मा के अनुसार इस खगोलीय घटना से धनु व मिथुन राशि के जातक सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। दोनों राशि वाले जिन जातकों के विवाह में अब तक बाधा आ रही थी, उनका विवाह सन् 2008 में सुनिश्चित है।
शुरू होंगे मांगलिक कार्य:
देवउठनी एकादशी पर देवताओं के जागृत होने के साथ ही इस दिन से शादी-ब्याह की शुरुआत हो जाएगी। शास्त्रगत मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर तुलसी का विवाह हुआ था, इसलिए इसे तुलसी विवाह के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष में देवउठनी ग्यारस, वसंत पंचमी व अक्षय तृतीया को विवाह का सबसे उत्तम मुहूर्त माना जाता है।
इस बार 2008 में मई व जून के दौरान शुक्र अस्त रहेगा, इसलिए 8 मई को पड़ने वाली अक्षय तृतीया के दिन विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं है। पं. दीपक शर्मा के अनुसार मई-जून में मुहूर्त कम होने के कारण देवउठनी एकादशी और वसंत पंचमी के दिन सर्वाधिक शादियां होने की उम्मीद है। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी थी और इसी दिन से चातुर्मास प्रारंभ हुआ था।
21 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास समाप्त हो रहा है। इन चार महीनों में गृह प्रवेश, गृहारंभ, वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद शुभ कार्यो की शुरुआत होगी। जलाराम मंदिर के पुजारी पं. ब्रह्मदत्त मिश्र ने बताया कि 7 नवंबर से 8 दिसंबर तक विवाह के 52 शुभ मुहूर्त हैं।
घरों में होगा तुलसी विवाह:
देवउठनी एकादशी पर घरों में गन्ने का मंडप तैयार का तुलसी विवाह किया जाएगा। महिलाएं तुलसी के साथ भगवान शालिग्राम के विग्रह की पूजा-अर्चना करेंगी और मिष्ठान्न का भोग लगाएंगी। इस पर्व को छोटी दीवाली के रूप में मनाया जाता है, लिहाजा शहर में भव्य आतिशबाजी होगी। बच्चे व युवा दीवाली की कसर देवउठनी एकादशी पर निकालेंगे और जमकर आतिशबाजी करेंगे।
किस ग्रह पर कैसा असर
गुरु का धनु राशि में प्रवेश धनु व मिथुन वालों के लिए शुभ होगा, वहीं मेष राशि के जातकों की समस्याओं का भी निराकरण होगा। वृषभ वालों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। कर्क वालों को कैरियर व सर्विस से संबंधित उपलब्धि प्राप्त होने के योग बनेंगे।
सिंह के जातकों को संतान पक्ष से संबंधित शुभ समाचार, कन्या के जातकों को संपत्ति, जमीन, मकान, वाहन या कैरियर संबंधी लाभ होगा, तुला राशि वालों का नया कार्य आरंभ होगा व संपर्क क्षेत्र बढ़ेगा।
वृश्चिक व कुंभ राशि के जातकों को आर्थिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी, वहीं मकर वालों के लाभ व आय में वृद्धि होगी। मीन राशि वालों को नई सर्विस या नए व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं।