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ठंडा हुआ गरम, लस्सी ने किए दांत खट्टे

जयपुर. आमेर महल में एक शीतल पेय कंपनी को जिन बाजार दरों पर अपने ब्रांड बेचने के लिए तीन काउंटर खोलने की स्वीकृति दी गई थी, वहां अब पर्यटकों से खुले आम मुहमांगी कीमतें वसूली जा रही हैं। जैसा ग्राहक, उतनी कीमत। कोई विरोध करता है तो एकाध रुपए कम कर दिए जाते हैं।

वास्तविक कीमत पर सामान खरीदने की बात करने वालों को दुत्कार दिया जाता है। बाजार में 20 रुपए में मिलने वाली आधा लीटर शीतल पेय की बोतल के 25-30 रुपए वसूले जा रहे हैं। महल में केवल इसी कंपनी के ब्रांड उपलब्ध हैं।

गौरतलब है कि महल में केवल एक कंपनी विशेष के ब्रांड बेचने का नियम विरुद्ध टेंडर देने का भास्कर ने खुलासा किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर महल अधिकारियों ने पर्यटकों की सुविधा के लिए वाजिब कीमतों पर सरस डेयरी उत्पाद बेचने की पहल (एक काउंटर) की थी। अब डेयरी प्रोडक्ट भी पर्यटकों को अधिक मूल्य पर बेचे जा रहे हैं। आमेर महल में कंपनी के तीन और सरस डेयरी का एक काउंटर है।

यूं किया खुलासा
एक पर्यटक दीवान-ए-आम में शीतल पेय खरीदने काउंटर पर पहुंचा। वहां आधा लीटर शीतल पेय ब्रांड बोतल के वास्तविक कीमत से 5 रुपए ज्यादा बताने पर पर्यटक ने इसका विरोध जाहिर किया तो टका-सा जवाब, ‘लेना है तो लो, यहां तो इतने ही लगेंगे।’

ज्यादा कीमतों की शिकायत अधिकारियों को करने का भी काउंटर पर खड़े व्यक्ति पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद बहस करने पर उसने 25 रुपए का बिल भी काटकर थमा दिया। जबकि इस बोतल पर 20 रुपए अंकित किए हुए थे। इससे पहले जलेबी चौक में खुले दो काउंटरों पर भी उस पर्यटक को यही मूल्य बताया गया था।

जलेबी चौक में सरस डेयरी काउंटर पर संवाददाता पहुंचा तो उसे लस्सी की कीमत 12 रुपए बताई गई और ज्यादा कीमतों का विरोध करने पर कुछ भी देने से मना कर दिया। इसके बाद संवाददाता ने महल घूमने आए एक स्कूल विद्यार्थी को लस्सी खरीदने भेजा।

काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने स्टूडेंट को दो 250 एमएल लस्सी के पैकेट के 20 रुपए काट लिए। विद्यार्थी की ओर से स्कूल से इसका बिल पास कराने की जिद करने पर सादा कागज पर बिल बनाकर उस पर अपना साइन भी कर दिया।

मैं तो ईमानदार हूं!
महल अधीक्षक जफरउल्ला खान को जब ज्यादा कीमतों की बात बताई तो पहले तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जब भास्कर संवाददाता ने उन्हें अधिक कीमतों का बिल दिखाया तो सकपकाए से बोले-निजी कंपनी से महल में बाजार कीमतों के मुताबिक ही प्रोडक्ट बेचने का करार हुआ था। ज्यादा कीमतें लेने की बात मुझे नहीं मालूम। मैं तो ईमानदार आदमी हूं, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। फिर भी इसके लिए जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

ऐसा है तो ठीक करेंगे
>> एमओयू में तो एमआरपी पर ही कंपनी ब्रांड बेचना निर्धारित हुआ था। कीमतें ज्यादा लेने की बात हमारी जानकारी में नहीं है, फिर भी जांच कराकर एमआरपी रेट्स में ही कीमतें बेची जाएंगी।
-कल्याण रंजन, रीजनल मैनेजर, कोका-कोला





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