जयपुर. रामसेतु रक्षा के लिए प्रदेश में 12 सितंबर को 2 घंटे के चक्काजाम को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। याचिका में इन दोनों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बालिया, न्यायाधीश मोहम्मद रफीक ने श्रीपाल जैन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिए। याची के वकील अनुपम अग्रवाल ने अदालत को बताया कि 12 सितंबर को आयोजित चक्काजाम जन अधिकारों के खिलाफ था।
इसका आयोजन विभिन्न हिंदू संगठनों ने किया था। भाजपा ने इसका समर्थन किया था। चक्का जाम के कारण बीमार अस्पताल नहीं पहुंच सके, बच्चे स्कूल नहीं जा पाए, कर्मचारी अपने आफिस नहीं जा सके।
राज्य सरकार ने जबरन बंद करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। सुप्रीमकोर्ट ने भी बंद को गैरकानूनी घोषित कर रखा है। सभी संगठन को अपनी मांग आमजन के सामने रखने का अधिकार है लेकिन जनता को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस बंद से आम जनता को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया।
याचिका में अनुरोध किया गया है कि इस मामले में मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक की भूमिका की जांच कर उन्हें दंडित किया जाए। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया पर नगद जुर्माना किया जाए।
सभा या प्रदर्शन के लिए स्थान व समय निर्धारित करने के साथ उन्हें नगर निगम से सफाई व्यवस्था की अनुमति अनिवार्य लेना किया जाए। साथ ही आयोजकों से एक रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से सफाई खर्च व बैंक गारंटी ली जाए।