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सरकार ने कराई तस्कर की रिहाई

जयपुर . राज्य सरकार ने 10 साल की सजा काट रहे एक हेरोइन तस्कर को समयपूर्व जेल से रिहा कर दिया। यह सजा उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर हाईकोर्ट ने दी थी। एक्ट के अनुसार राज्य सरकार को ऐसा करने का अधिकार ही नहीं है। इतना ही नहीं सरकार ने इस मामले की पूरी जानकारी राज्यपाल को भी नहीं दी।

गृह विभाग ने भी बताया है कि इस प्रकरण में अभियोजन एवं विधि विभाग से कोई राय नहीं ली गई। इस प्रकरण से संबंधित गृह विभाग की पत्रावली से यह मामला उजागर हुआ है। इस पत्रावली के कुछ अंश ‘भास्कर’ को हाथ लगे हैं। इनके अनुसार एक बंदी को बुजुर्ग बताकर रिहा कर दिया गया। असल खेल इस बंदी मूलचंद जैन (जैसलमेर) की रिहाई के बाद शुरू हुआ।

एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद कई कैदियों की रिहाई के आवेदन धड़ाधड़ पेश हुए। समझा जाता है कि कुछ असरदार लोगों ने इन्हें छुड़वाने के लिए ही मूलचंद की रिहाई की व्यूह रचना की थी। एक्ट के जानकारों का कहना है कि पूरे देश में यह अपने किस्म का पहला मामला है जब संविधान की विशेष शक्तियों के जरिए किसी राज्य सरकार ने राज्यपाल से एक हेरोइन तस्कर को रिहा करवाया।

इस मामले में ‘भास्कर’ ने तत्कालीन कलेक्टर और एसपी तक से बातचीत की कोशिश की, लेकिन सबने प्रकरण को यह कहकर टाल दिया कि उन्हें ध्यान नहीं है। पत्रावली देखकर ही कुछ कहा जा सकता है।

ऐसे करवाई रिहाई :
सूत्रों का कहना है कि हेरोइन तस्करी के दोष में 10 साल की सजा भोग रहे जैसलमेर के मूलचंद जैन की रिहाई के आदेश राज्य सरकार ने राज्यपाल से संविधान के अनुच्छेद 161 में विशेष शक्तियों के तहत करवाए और कानून के उन प्रावधानों को छुपा लिया, जिनमें साफ उल्लेख था कि देश में न कोई सरकार और न ही कोई अदालत एनडीपीएस एक्ट के बंदी को रिहा करवा सकती है।

क्या कहता है कानून? :
एनडीपीएस एक्ट की धारा 32 ए में साफ उल्लेख है कि राज्य सरकार को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सजा कम करने के अधिकार इस कानून पर लागू नहीं होंगे, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने न केवल इस बंदी की रिहाई करवाई, बल्कि विधिवेत्ताओं से भी परामर्श नहीं किया।

इसके बाद उसने कई अन्य ऐसे हेरोइन के तस्करों की पत्रावलियां भी राजभवन भेजीं, लेकिन तब तक एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों की जानकारी उजागर हो चुकी थी। लिहाजा, सरकार का खेल धरा रह गया।

प्रकरण एक नजर में सजायाफ्ता बंदी, जिसे रिहा किया गया :
मूलचंद जैन पुत्र गंभीरमल जैन निवासी बरमसर, जिला जैसलमेर।

अपराध :
एक अप्रैल 1999 को जैसलमेर थाना के बरमसर के निकट मूलचंद से कुल 3500 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। उसके साथ तीन लोग थे। खुद मूलचंद के पास 750 ग्राम की थैली थी।

सजा :
जोधपुर स्थित एनडीपीएस कोर्ट के न्यायाधीश शिवदयाल मूथा ने मूलचंद जैन सहित तीन लोगों को 10-10 साल की सजा और एक-एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया था। जोधपुर हाईकोर्ट ने इस फैसले को उचित करार देते हुए बाकी सजा जेल में पूरी करने के आदेश दिए थे।

>> अभी मुझे इस प्रकरण के बारे में ध्यान नहीं है। इस बारे में वर्तमान गृह सचिव ही कुछ कह सकते हैं।
प्रेमसिंह मेहरा, तत्कालीन गृह सचिव

>> मैं अब चित्तौड़गढ़ में पद स्थापित हूं। इस प्रकरण के बारे में तो जैसलमेर के जिला कलेक्टर की कुछ कह सकते हैं, क्योंकि पत्रावली उन्हीं के पास है।
पीएल अग्रवाल, तत्कालीन जिला कलेक्टर, जैसलमेर

यह कानून का मजाक है >> राज्य सरकार ने एक हेरोइन तस्कर को एनडीपीएस कानून के तहत समय पूर्व रिहा करवाकर न केवल कानून का मजाक उड़ाया है, बल्कि आपराधिक सजा पाए लोगों की रिहाई में ऐसा कोई मामला शायद ही कभी सामने आया हो।
ईशर सिंह, एनडीपीएस मामलों के जानकार अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

क्या कहता है गृह विभाग? >> केंद्रीय कारागृह जोधपुर के एनडीपीएस बंदी मूलचंद जैन पुत्र गंभीरमल जैन निवासी जोधपुर को 10 साल की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना किया गया था। उसे दयायाचिका के आधार पर समय पूर्व रिहाई दी गई थी। इस प्रकरण में अभियोजन एवं विधि विभाग से कोई राय नहीं ली गई।
शासन उप सचिव, गृह जेल का भास्कर को लिखित जवाब

>> आप जेल विभाग के आईजी से पूछ लें कि असली मामला क्या था। पुराना मामला होने के कारण मुझे अभी ध्यान नहीं है कि असल में बात क्या थी ? अगर आपके पास प्रकरण के कागज हैं तो आप ठीक ही कह रहे होंगे।
गुलाबचंद कटारिया, गृह मंत्री





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