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ये तेवर चुनावी क्यों?

राजधानी हरियाणा हरियाणा में विधानसभा चुनाव अभी करीब सवा दो साल दूर है लेकिन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणाओं का अंदाज चुनावी-सा नजर आ रहा है। अगस्त में हुड्डा ने घोषणा की थी कि किसानों को प्रति एकड़ रायल्टी दस हजार रुपए 33 साल तक दिए जाएंगे, लेकिन नवंबर आते-आते रायल्टी 30 हजार तक पहुंच गई है। शायद जनवरी तक इसमें और इजाफा हो जाए। पूछे जाने पर मुख्यमंत्री किसी दबाव से साफ इनकार करते हैं, ‘ना ये चुनावी वादा था और ना इसके लिए किसी ने मांग की थी।’ कहते हैं हुड्डा और जोड़ते हैं कि उन पर किसी का कोई दबाव नहीं था। लेकिन घोषणाओं की इस फुलझड़ी में किसानों का नहीं तो आम आदमी का कन्फ्यूजन बढ़ा ही है, घटा नहीं।

हरियाणा सरकार ने कभी ये कहा था, कम से कम अखबार तो यही कहते हैं, कि एसईजेड के लिए भूमि अधिग्रहण सरकार नहीं कंपनियां करेंगी। जो लाइसेंसी हैं, वे खुद किसानों से सौदेबाजी कर मार्केट रेट पर जमीन खरीदेंगी। पर हरियाणा सरकार के एक आला अफसर ने कहा कि राज्य के एसईजेड एक्ट के तहत 25 फीसदी जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार कर सकती है और रायल्टी बस उसी जमीन पर दी जाएगी जिसे हरियाणा सरकार अधिग्रहण करेगी। सोमवार को एक अन्य अधिकारी ने दैनिक भास्कर को यह जानकारी दी कि रायल्टी भी सरकार अपने से नहीं देगी, लाइसेंसी कंपनी को ही देनी पड़ेगी।

यानि अगर रिलायंस इंडस्ट्री एसईजेड के लिए जमीन खरीदती है तो उसे हरियाणा सरकार को किसानों के लिए रायल्टी भी देनी पड़ेगी और सरकार बिचौलिये की भूमिका में काम करेगी। जाहिर है कि रायल्टी की कोई राजनीति होगी, कोई मजबूरी जिसके चलते सरकार को बार-बार घोषणाएं बदलनी पड़ी हैं। इस सवाल का भी अब तक कोई जवाब नहीं है कि आखिर एसईजेड के लिए जमीनकी रायल्टी, बाकी भूमि अधिग्रहण के लिए दी जा रही रायल्टी से डबल क्यों, ये दोहरा मापदंड कानून की कसौटी पर खरा उतरेगा कि नहीं।

सनद रहे कि केंद्र सरकार ने हरियाणा में 57 एसईजेड की मंजूरी दे दी है। हरियाणा में लगने वाला देश का सबसे बड़ा एसईजेड प्रोजेक्ट रिलायंस ग्रुप लगा रहा है जिसके लिए गुड़गांव और झज्जर में 12500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार इसमें से 8500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। हुड्डा सरकार के कार्यकाल में कुल मिलाकर 15 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं से कुछ ऐसे सवाल पैदा हो गए हैं जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं।

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी जमीन का मुआवजा बढ़ाया गया है और अब उन्हें रायल्टी देने का फैसला किया गया है। न यह चुनावी वादा था और न इसके लिए किसी ने मांग की थी। इस मामले में उन पर किसी तरह का कोई दबाव भी नहीं था।’

- भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

जमीन का अधिग्रहण किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए। एक ओर तो अन्न की कमी पड़ रही है। दूसरा हम जमीनों पर उद्योग खड़े कर रहे हैं। उद्योग पैसा दे सकते हैं। मगर अन्न नहीं।

-मदनपाल राणा, भाकियू नेता

किसान दुकानदारी, व्यापार और नौकरी तो नहीं कर सकता। इसलिए सरकार को भूमि अधिग्रहण का कोई दूसरा सार्थक हल खोजना होगा। - डा. संदीप कुमारकृषि अर्थशास्त्री





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