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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.पुलिस स्टेशन, फेज-1, मोहाली पीजीआई से मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। थाने में 5 नवंबर को एक गुमशुदा की शिकायत लिखवाई जाती है, लेकिन पुलिस यह जहमत नहीं उठाती कि गुमशुदा को ढूंढने के लिए अस्पतालों को चेक करे। 4 नवंबर को इस गुमशुदा व्यक्ति को बेहोशी की हालत में खुद पंजाब पुलिस ने पीजीआई की इमरजेंसी में भर्ती करवाया था।
भास्कर में फोटो छपने के बाद इस गुमशुदा की पहचान मोहाली के रहने वाले गुरप्रीत सिंह उर्फ बबलू (35) के रूप में उसकी मां जसबीर ने की। लेकिन पुलिस के रिकॉर्ड में वह आज भी गुमशुदा है, क्योंकि पुलिस ने पीजीआई तक जाने की जहमत नहीं उठाई। जसबीर कौर ने बताया कि बबलू 4 नवंबर को अपनी पत्नी बलविंदर को मायके छोड़ने स्कूटर पर पंजाब के अल्लापुर गांव गया था। पत्नी को मायके छोड़कर गुरप्रीत को अपने दोस्त की बारात में बस्सी पठाना जाना था, लेकिन वह बारात में नहीं पहुंचा और न ही घर लौटा।
काफी ढूंढने के बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत फेज-1 के पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस की तरफ से उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिला। रविवार को भास्कर में गुरप्रीत की फोटो देखकर रिश्तेदारों ने गुरप्रीत के परिजनों को सूचित किया तो उन्होंने पीजीआई जाकर उसकी पहचान की।
गुरप्रीत को हेड इंजरी है और वह बेहोशी की हालत में इमरजेंसी में पड़ा है। गुरप्रीत शादीशुदा है और उसकी दो बेटियां हैं। वह मोहाली में आटे का बिजनेस करता है।
झगड़े के बाद हुआ था बेहोश जसबीर कौर ने बताया कि गुरप्रीत को एक अज्ञात व्यक्ति ने पुलिस की मदद से पीजीआई पहुंचाया। उस व्यक्ति ने परिजनों को बताया कि बस्सी पठाना के पास गुरप्रीत का किसी से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद वह बेहोश हो गया था।
बाकी गुरप्रीत के होश में आने के बाद पता चलेगा कि उसके साथ क्या हुआ। गुरप्रीत की जेब से न ही पैसे मिले निकला था और ही कोई पहचान-पत्र मिला।
कोई तालमेल नहीं पीजीआई से कुछ दूरी पर पुलिस स्टेशन फेज-1 और जहां पर गुरप्रीत बेहोशी की हालत में पड़ा था वह इस थाने से महज एक घंटे की दूरी पर, लेकिन फिर भी पुलिस में कोई तालमेल नहीं।
एक तरफ पंजाब पुलिस को गुमशुदगी की शिकायत दी गई, दूसरी तरफ पंजाब पुलिस की मदद से ही गुरप्रीत को पीजीआई पहुंचाया गया।
पता नहीं करवाया एड्रेसजिस स्कूटर पर गुरप्रीत गया था, वह स्कूटर बस्सी पठाना में ही खड़ा है। पुलिस ने यह जहमत भी नहीं उठाई कि स्कूटर के नंबर से उसका एड्रेस पता करवाकर उसकी पहचान करवाने की कोशिश करे। दबे हुए हैं राज :
पीजीआई की इमरजेंसी में हेड इंजरी के कारण भर्ती रिक्की और गुरप्रीत सिंह दोनों को किसी ने मारा और घायल कर भाग गए। दोनों बेहोश हैं। दोनों के साथ क्या हुआ, किसने मारा, किसने लूटा, यह अभी राज है। दोनों की जेब से सामान गायब था। दोनों के राज तब खुलेंगे, जब वे होश में आएंगे।
क्या होता हैअगर किसी की गुमशुदगी की शिकायत की जाती है तो उसकी फोटो सभी थानों में सकरुलेट की जाती है। अस्पतालों की चौकियों में इत्तला दी जाती है, लेकिन इस मामले में न ही अस्पतालों को कोई सूचना मिली और न ही दूसरे पुलिस स्टेशन से। यहां तक कि व्यक्ति का हुलिया बताया जाता है और पुलिस कंट्रोल रूम के वायरलेस पर मैसेज भेजा जाता है कि जहां भी इस तरह का कोई व्यक्ति मिले उसकी सूचना दी जाए, पर गुरप्रीत के मामले में ऐसा नहीं हुआ।