राजधानी हरियाणा .
पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उसके परिवार के 8 लोगों की हत्या के मामले में बेटी सोनिया और दामाद संजीव को 26 नवंबर को फांसी नहीं होगी। मामला राष्ट्रपति के पास विचाराधीन होने से फांसी फिलहाल टल गई है। अंबाला जेल सूत्रों का कहना है कि इसके लिए जरूरी तैयारियां उन्होंने कर ली थी, लेकिन याचिका पर कोई फैसला न होने के कारण यह अनिश्चित काल के लिए टल गई है। अंबाला जेल में 1999 के कैदी धर्मपाल को हुई फांसी पर भी कोई आदेश राष्ट्रपति को की गई याचिका पर नहीं मिले हैं।
8 सितंबर को जारी हुए थे डेथ वारंट :
23 अगस्त 2001 को घटित रेलू राम हत्याकांड में जिला अदालत ने 27 मई 2004 को दोषी करार दिया था। 31 मई 2004 को फांसी के आदेश सुनाए। 12 अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट ने फांसी की सजा उम्रकैद में बदली। 23 अगस्त 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद का आदेश रद्द किया।15 फरवरी 2007 को फांसी की सजा बरकरार रखी। 8 सितंबर को डेथ वारंट जारी किया।
क्या था मामला
बरवाला के पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया के साथ उनकी बेटी सोनिया का संपत्ति विवाद था। जिसके चलते 8 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। मारे गए लोगों में रेलू राम पूनिया, उनकी पत्नी कृष्णा, बेटी पम्मा, बेटा सुनील, पत्नी शकुंतला, बच्चे लोकेश ढाई साल, शिवानी डेढ़ साल, बेटी प्रीति डेढ़ माह की हत्या हो गई थी।
फिलहाल काल कोठरी से राहत नहीं अम्बाला : रेलू राम पूनिया हत्याकांड में फांसी की सजायाफ्ता संजीव और सोनिया ने सोमवार को राहत की सांस ली। लेकिन उन्हें अभी काल कोठरी से राहत मिलने वाली नहीं है। जेल अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से फांसी के कैदी को काल कोठरी में रखा जाता है। सोनिया जेल में कविताएं पढ़ती रहती है। वह जेल के कार्यक्रमों में भी कविता सुनाती है।
रेलूराम हत्याकांड के आरोपी सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका डाल दी है। लिहाजा उन्हें 26 नवंबर को फांसी नहीं होगी। -जगजीत सिंह, जेलर अंबाला सेंट्रल जेल