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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर- 32 में डायरेक्टर प्रिंसिपल की पोस्ट का मामला और उलझता जा रहा है। सोमवार को इस अस्पताल के 6 हेड ऑफ डिपार्टमेंट (एचओडी) ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में याचिका दायर की है कि इस पोस्ट को डेपुटेशन पर नहीं यूपीएससी के जरिए भरा जाए ताकि सबको बराबर मौका मिले।
इससे पहले जीएमसीएच-32 के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और पैथोलॉजी के एचओडी डॉक्टर हर्ष मोहन ने भी इसी तरह याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई मंगलवार को होगी। सोमवार को जीएमसीएच-32 के साइकेट्रिक डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. बीएस चवन, पल्मोनरी मेडिसन के एचओडी डॉ. एके जनमेजा, ईएनटी के एचओडी डॉ. अजरुन दास, ऑप्थैल्मोलॉजी के एचओडी डॉ. एस सूद, एनेस्थीसिया के एचओडी डॉ. केके गुम्बर और रेडियो डायग्नोसिस की एचओडी डॉ. सुमन कोचर ने कैट में याचिका दायर की है।
याचिका में डॉक्टरों ने कहा है कि अगर यूपीएससी में उन्हें इस पोस्ट के लिए कंसीडर किया जा सकता है, तो चंडीगढ़ प्रशासन डेपुटेशन के लिए उन्हें क्यों नहीं कंसीडर कर रही। उन्हें सीधे तौर पर रिजेक्ट किया गया है। इससे पहले पूर्व डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. एचएम स्वामी की यूपीएससी के जरिए नियुक्ति के समय इस अस्पताल से डॉक्टरों को कंसीडर किया गया था। डॉक्टरों का कहना है, जो उनका हक है कम से कम उन्हें मिलना चाहिए। ये डॉक्टर्स दस-दस साल से ज्यादा के एक्सपीरियंस वाले हैं।
प्रमोशन के चांसेस हो जाते हैं कम :
डेपुटेशन पर आने वाले 2 साल के लिए नियुक्त किए जाते हैं। यह टेम्पररी अरेंजमेंट होता है। इसमें उसी अस्पताल के डॉक्टर्स अप्लाई नहीं कर सकते, जबकि यूपीएससी के जरिए की जाने वाली नियुक्तियों में डेपुटेशन के लिए उसी अस्पताल के साथ ही बाहर के डॉक्टर्स भी अप्लाई कर सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि जीएमसीएच-32 के डॉक्टर्स डेपुटेशन पर बाहर जाते हैं, क्योंकि अस्पताल में हेड ऑफ डिपार्टमेंट बनने के बाद उनकी प्रमोशन के चांसेस नहीं रह जाते। अब प्रशासन ने हेड ऑफ डिपार्टमेंट की पोस्ट भी 3 साल के रोटेशन बेस पर कर दी है।
फिर भी डेपुटेशन :
पूर्व डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. एचएम स्वामी की 2003 में नियुक्ति के समय चंडीगढ़ प्रशासन ने इसी तरह डेपुटेशन पर पोस्टें मांगी थीं, जिसके लिए मात्र तीन डॉक्टर ही आए थे। प्रशासन ने खराब रिस्पॉन्स देखते हुए ये पोस्ट यूपीएससी के जरिए भरी। इस बार दो बार विज्ञापन देने के बाद केवल दो ही डॉक्टर्स (एक पीजीआई से और एक शिमला से) को इस पद के लिए इलीजिबल माना गया। फिर भी चंडीगढ़ प्रशासन इस पोस्ट को डेपुटेशन पर भर रही है, इसके लिए इंटरव्यू भी लिए जा चुके हैं।