जालंधर.
स्कूल का काम बच्चों का भविष्य संवारना और उन्हें अच्छा नागरिक बनाना है, लेकिन जालंधर जिले में एक स्कूल ऐसा भी है जहां बच्चों का भविष्य दांव पर है। स्कूल आने वाले बच्चों के दिन की शुरुआत होती है झाड़ू, पोछा से। इसके बाद वे टीचर्स के लिए चाय बनाते हैं।
फिर अगर टीचर का मूड अच्छा हुआ तो थोड़ी-बहुत पढ़ाई होगी नहीं तो बच्चे खुद ही पढ़ाई करें। उनके भविष्य की किसी को परवाह नहीं है। यह हाल है जिले के सरकारी प्राइमरी स्कूल सोहलपुर का। शनिवार को सिटी रिपोर्टर ने स्कूल का दौरा किया तो पाया स्कूल में कुल छह टीचर हैं और पिछले दो दिन से सभी गैरहाजिर हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरे स्कूल से टीचर को बुलाया गया था, जो यहां 17 बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने स्कूल के 43 बच्चों को छोड़कर आया था। जिला परिषद के अंडर आते इस स्कूल में 17 बच्चों के लिए छह टीचर्स लगाए गए हैं।
जबकि गांव के सरपंच जसवीर सिंह का कहना है स्कूल में टीचर्स की सिर्फ दो पोस्ट होनी चाहिए। उन्होंने बताया जब 4 टीचर्स को स्कूल में भेजा गया तो उन्होंने इसका विरोध भी किया था और जिला परिषद के डिप्टी सीईओ को रिटन में शिकायत की थी।
डीप्टी सीईओ ने कहा था कि स्कूल के बच्चे गलती से 20 की जगह 200 चले गए हैं जिस कारण ज्यादा टीचर्स की पोस्टें क्रिएट हो गई हैं एक बार जॉइन करने दो बाद में सभी को शिफ्ट कर दिया जाएगा। एक साल बाद दो टीचर्स सतवंत कौर व जसवीर कौर को टैंपरेरी तौर पर बीडीओ ऑफिस भेज दिया गया, जबकि स्कूल की दो टीचर्स मोनिया और हरप्रीत मैटरनिटी लीव और एक टीचर संगीता रानी डेपुटेशन पर है। फिलहाल स्कूल सिर्फ एक टीचर के सहारे चल रहा है।
स्कूल में 17 बच्चों के लिए दो कमरे हैं। एक क्लास में जितने बच्चे आ जाए ठीक हैं दूसरों को बाहर बिठा दिया जाता है और दूसरे में स्कूल का ऑफिस है किचन भी है और मिड डे मील के लिए स्टोर भी बनाया गया है। स्कूल में ब्लैक बोर्ड का इस्तेमाल 31 अक्तूबर को हुआ था और इसके बाद ब्लैक बोर्ड पर कभी कोई काम नहीं करवाया गया। यहीं नहीं स्कूल में फाइलें व जरूरी कागजात रखने के लिए अलमारी तो है लेकिन उसे बंद करने वाला स्कूल में कोई नहीं है।
खुद करना पड़ता है काम जिला परिषदों के अंडर आते सरकारी प्राइमरी स्कूलों में चपरासी की कोई पोस्ट रखी ही नहीं गई है। अगर स्कूल में किसी तरह के काम की जरूरत पड़ती है, तो वो टीचर्स को खुद करना पड़ेगा। सरकारी स्कूल सोहलपुर में टीचर्स स्कूल का सारा काम खुद करने की बजाय बच्चों से करवाते हैं, जिस कारण बच्चे स्कूल में पढ़ने की बजाए स्कूल के काम में ही लगे रहते हैं। यही नहीं इन स्कूलों में किसी चौकीदार की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
सोहलपुर स्कूल में गलती से पिछले साल 25 की जगह 250 स्टूडैंट्स लिखे गए थे जिस कारण छह टीचर्स की पोस्टें क्रिएट हो र्गई। सारे टीचर गैरहाजिर हैं इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। शनिवार को ऑफिस बंद था इसी कारण उस स्कूल की टैंपरेरी तौर पर बीडीओ ऑफिस आई दो टीचर्स भी छुट्टी पर थीं। -परमजीत सिंह, बीडीओ भोगपुर
प्राइमरी स्कूल में एक टीचर को कम से कम 16 स्टूडैंट्स पढ़ाने होते हैं। काफी स्कूलों में यह प्रॉब्लम है कई स्कूल तो खाली पड़े हैं और कुछ में ज्यादा टीचर्स हैं। इस प्रॉब्लम को जल्द ही हल कर दिया जाएगा। -अशोक सिक्का, सीईओ, जिला परिषद