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खुशियां बांटती स्माइल ट्रेन

जालंधरक्लैफ्ट, पैलेट लिफ्ट व बर्न की प्रॉब्लम से जूझ रहे बच्चों की जिंदगी में खुशियां बांटती स्माइल ट्रेन 26 तक सिटी में रहेगी। जो लोग प्लास्टिक सर्जरी क ा खर्च नहीं उठा सकते उनके लिए पसरीचा हॉस्पिटल के साथ मिलकर काम कर रही यूएसए की चैरिटी आर्गेनाइजेशन की स्माइल ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं है।

16 नवंबर से शुरू हुए इस कैंप में अब तक क्लैफट व पैलेट प्रॉब्लम से ग्रस्त 7 बच्चों का फ्री ट्रीटमैंट किया जा चुका है। ढाई साल में हॉस्पिटल से मिलकर स्माइल ट्रेन आर्गेनाइजेशन ने 350 बच्चों के चेहरे के कटे हिस्सों की फ्री सर्जरी कर उनको मुस्कराहट से भरी एक नई जिंदगी दी है।

3 महीने में आती है स्माइल ट्रेनडा. पुनीत पसरीचा ने बताया ढाई साल पहले उनके इन्वीटेशन पर स्माइल ट्रेन की टीम ने हॉस्पिटल विजिट की। यूएसए की ये आर्गेनाइजेशन वल्र्ड में चैरेटी देती है। तब से हर तीन महीने बाद कैंप लगाया जाता है। हम सालभर पेशेंट्स की तलाश करते हैं।

उन्होंने बताया सर्जरी में 10-12 हजार का खर्च आता है। हम पहले पर्सनल लैवल पर खर्च उठाते हैं, फिर पेशेंट्स के प्री व पोस्ट आपरेशन फोटोज आर्गेनाइजेशन को भेजे जाते हैं। जांच के बाद फिर वे हमें बेसिक खर्च की फंडिंग भेज देते हैं। इसके अलावा सौरव मैमोरियल चैरीटेबल ट्रस्ट व होप इंटरनैशनल भी फंडिंग करती हैं।

उन्होंने बताया इसमें 2-3 महीने के बच्चों से लेकर 40 की उम्र तक में हम फ्री सर्जरी करते हैं। ऑपरेशन के बेसिक खर्च जैसे ओटी मैडीसिन, एनेस्थीसिया,आईसीयू व सभी मैडीसिन का खर्च ऑर्गेनाइजेशन उठाती है व हॉस्पिटल के डाक्टर्स अपनी फीस न लेकर स्माइल बढ़ाने में हिस्सेदारी देते हैं।

नहीं कोई क्राइटीरियारूरल व अर्बन एरियाज में पब्लिसिटी के लिए होर्डिग्स, मीडिया, पैम्फलैट्स की मदद ली जाती है। बाकी पेशेंट टू पेशेंट इन्फार्मेशन पहुंच जाती है। पंजाब के साथ-साथ चंडीगढ़, हिमाचल व हरियाणा तक से पेशेंट्स इलाज के लिए आ जाते हैं। होशियारपुर के मानव व जालंधर के कशिश, ऊना के अभि जैसे बच्चों क े पेरेंट्स ने बताया हमारे लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।





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