अमृतसर. पति नशे का आदी है और पत्नी की परवाह नहीं करता। यहां तक कि घर का खर्च चलाना भी पत्नी के लिए मुश्किल हो गया है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि पत्नी सिर्फ तालाक चाहती है। ऐसे में भी एक गुंजाइश बाकी रहती है और वह है शक्ति महिला सहायता केंद्र।
कचहरी चौक के पास स्थित यह केंद्र न सिर्फ टूटते रिश्तों को बचाने में मददगार है, बल्कि यहां पर दी जाने वाली काउंसिलिंग जन्मों तक रिश्तों की गर्माहट को बनाए रखती है। केंद्र की प्रेजीडेंट प्रो. विमल बस्सी बताती हैं कि ऐसे-ऐसे केस आते हैं, जिन्हें पहले-पहल तो समझना ही मुश्किल हो जाता है, लेकिन स्टेप-बाय-स्टेप काउंसिलिंग से मसला सॉल्व होने की उम्मीद बन जाती है।
यहां पर आने वाले केसों में पति का ड्रग एडिक्ट होना, पति-पत्नी के बीच तकरार और दहेज के लिए ससुराल पक्ष द्वारा सताया जाना शामिल हैं। इनके अलावा सैक्सुअल हैरासमेंट और घर चलाने में असमर्थ पतियों की शिकायतों से संबंधित केस भी होते हैं।
ऐसे केसों में शिकायत दर्ज करने के बाद दूसरे पक्ष की भी सुनवाई की जाती है और आपसी बातचीत से मसला सॉल्व करने की कोशिश की जाती है। प्रो. बस्सी बताती हैं कि दर्ज होने वाले केसों में अधिकतर हल हो जाते हैं। काउंसिलिंग के लिए केंद्र में पर्याप्त स्टाफ है और अलग-अलग डिपार्टमेंट के हैड एंड एक्सपर्ट्स की मदद भी ली जाती है, चाहे वह नशा छुड़ाओ केंद्र हो या मेंटल अस्पताल।
इस केंद्र की स्थापना 22 नंवबर, 1988 को हुई थी। तब से ही यह केंद्र टूटते घरों को बचाने में प्रयासरत है। इस वर्ष एक जनवरी से 31 अक्तूबर तक 250 केस आए। इनमें से अधिकतर केसों का निपटारा दोनों पक्षों की बातचीत से कर दिया गया है। काउंसिलिंग मुफ्त की जाती है। अमृतसर के अलावा यहां दूसरे राज्यों और शहरों के केस भी आते हैं।
टूटने से बचाए घर.. तलाक चाहिए, बस तालाक
केंद्र की जनरल सेक्रेट्री वीना मेहरा बताती हैं कि एक बार तो एक महिला आई और कहने लगी कि उसे तो तालाक चाहिए, बस तालाक। केस रजिस्टर्ड करने के बाद तीन-चार बार सिटिंग करके काउंसिलिंग की गई। इसमें दूसरे पक्ष को भी शामिल किया गया। वह महिला अपने फैसले से टस-से-मस न हुई और बस तालाक की रट लगाए हुए थी।
मामले को सुलझता न देख उन्होंने (वीना मेहरा ने) सोचा कोई नतीजा नहीं निकलने वाला। उनका एक बच्च भी था, जिसे मां या पिता से अलग नहीं किया जा सकता था। तालाक के फार्म भर लिए गए और अंत में उन्होंने पति और पत्नी दोनों को कुछ देर बाहर बात करने के लिए भेज दिया। एक घंटे बाद जब वह महिला अंदर आई तो बोली कि वह ससुराल जाएगी, उसे तालाक नहीं चाहिए। वह महिला आज भी अपने पति के साथ ससुराल में सुख से रह रही हैं। दोनों के बीच कुछ मतभेद थे, काउंसिलिंग के दौरान केंद्र ने वह दूर कर दिए।
सास-ननद से बने मधुर संबंध
एक बार ऐसा केस आया जिसमें पति और पत्नी एक-दूसरे से दुखी थे। पत्नी का कहना था कि पति घर में आते ही आग बबूला होने लगते हैं, जबकि पति का कहना था कि उसकी पत्नी उसकी बात नहीं मानती। काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि पत्नी हर वह चीज करने से मना करती थी जो उसके स्टेंडर्ड की नहीं रहती थी, क्योंकि वह ससुराल पक्ष से अधिक अमीर घराने से थी। अमीरी-गरीबी ही इस कलह की वजह थी। पति अगर कोई पुरानी चीज खरीदना चाहता तो पत्नी इसके लिए राजी नहीं होती। इससे घर का सारा माहौल तनावपूर्ण हो जाता। वजह पता चल जाने पर दोनों पक्षों के सदस्यों की काउंसिलिंग की गई और दोनों एक-दूसरे की बात मानने पर सहमत हो गए। आज वह परिवार सुखी है। यही नहीं पत्नी के अपनी सास और ननद से भी संबंध पहले से ज्यादा अच्छे हो गए।
पति पहुंचा पत्नी की शिकायत लेकर एक बार पति अपनी पत्नी की शिकायत ले कर पहुंचा। उसने बताया कि शादी के बाद उसके पेरेंट्स के साथ अनबन शुरू हो गई। ऐसे में उसने अपनी पत्नी के साथ घरवालों से अलग रहना शुरू कर दिया। पत्नी पर भरोसा करके उसने जमीन जायदाद और रुपए उसके नाम कर दिए, लेकिन बाद में पत्नी ने उसे घर से ही निकाल दिया।
हालांकि वह सरकारी नौकरी करता था, लेकिन इस सदमे में उसने नौकरी ही छोड़ दी। केंद्र में दोनों पक्ष को बुलाकर बातचीत की और काफी हद तक केस को सॉल्व किया। वीना ने बताया कि कई ऐसे केस आते हैं, जिनमें बच्चे अपने पेरेंट्स का सम्मान करना भूल जाते हैं या पति या पत्नी की किसी गैर से संबंध होते हैं। ऐसे केसों को भी सेंटर में सुलझाया जाता है।