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आज जागेंगे भगवान

बिलासपुर. देवताओं के जागृत होने के साथ ही बुधवार से शादी-ब्याह और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। देवउठनी एकादशी पर घरों में तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह रचाया जाएगा, वहीं बच्चे आतिशबाजी कर दीवाली की कसर पूरी करेंगे। बाजार में आज गन्ने, फल व पूजन सामग्री की जमकर बिक्री हुई।

चार माह के शयनकाल के बाद बुधवार को देवता जागृत होंगे और देवोत्थानी एकादशी मनाई जाएगी। माना जाता है कि आषाढ़ शुक्ल की प्रबोधिनी एकादशी से देवता शयनकाल में चले जाते हैं, जिनका जागरण कल देवउठनी एकादशी पर होता है। देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्यो का सिलसिला शुरू हो जाएगा और शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, नामकरण व अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे।

कहा जाता है कि देवउठनी एकादशी और अक्षय तृतीया पर विवाह के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती, लिहाजा बुधवार को कई जगहों पर शादियां होंगीं। देवउठनी एकादशी पर शहर में दीपावली सा माहौल होगा।

शाम ढलने के बाद महिलाएं घरों में आंगन में गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी व शालिग्राम का विवाह कराएंगी और पूजा-आराधना के बाद बच्चे पटाखे फोड़ेंगे। तिथियों में मतभेद के कारण कुछ जगहों पर मंगलवार को भी देवउठनी एकादशी मनाई गई। बुधवार को सूर्योदय के समय यह तिथि रहेगी, लिहाजा इसी दिन देवउठनी एकादशी मनाना श्रेयस्कर माना जा रहा है।

रावत नाच की मचेगी धूम
देवउठनी एकादशी के बाद शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में रावत नाच की धूम मचेगी। यहां रावत नर्तक दलों द्वारा बजगरियों से मोल-भाव आज से शुरू हो गया है। शनिचरी बाजार में छत्तीसगढ़ से बाहर के बजगरी पहुंचे हैं, जो नर्तक दलों के साथ घूमेंगे।

घरों-घर जाकर नर्तक दल आशीष देंगे, इसके एवज में उन्हें बख्शीश दी जाएगी। इस दौरान लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में रावत नाच महोत्सव होगा, जिसमें जिले भर से नर्तक दल अपनी शौर्य कला का प्रदर्शन करेंगे।

व्रत-उपवास से महंगे हुए फल
देवउठनी एकादशी के व्रत-उपवास के कारण में फलों की बिक्री एकाएक बढ़ गई है। इससे इनके दामों में भी वृद्धि हुई है। एकादशी की पूजा में गन्ने के अलावा शकरकंद, सिंघाड़ा, केला, सेब, बेर, आंवला, चना भाजी, मूंगफली, बैचांदी आदि का उपयोग किया जाता है।

कहा जाता है कि इन मौसमी फलों का सेवन एकादशी की पूजा के बाद ही शुरू करना चाहिए। पूजा में इन फलों से भगवान को भोग लगाया जाएगा। उपवास रखने वाले लोग इनसे ही पारणा करेंगे। बाजार में आज गन्ने पांच से 15 रुपए तक बिके। यहां देवकीनंदन चौक, बस स्टैंड, बृहस्पति बाजार, शनिचरी, बुधवारी बाजार, मुंगेली नाका, सीपत चौक सरकंडा के अलावा चौक-चौराहों व सड़कों के किनारे गन्नों की बिक्री हुई।

एक अनुमान के अनुसार एकादशी के पहले ही शहर में करीब 15 ट्रक गन्नों की खपत हुई। अंबिकापुर क्षेत्र से पहुंचा गन्ना काफी महंगा बिका, वहीं लोरमी-पंडरिया व रानीगांव के गन्नों की कीमत 5 से 15 रुपए तक रही।

इसके अलावा केला 15 से 20 रुपए दर्जन, सेब 40 से 60 रुपए किलो, बेर 40 रुपए किलो, आंवला 20 रुपए किलो, शकरकंद 10 से 15 रुपए किलो, मूंगफली 25 से 30 रुपए किलो व बैचांदी 60 रुपए पाव बिकी। पूजा में प्रयोग में आने वाली चना भाजी की कीमत 10 रुपए पाव थी। इसके अलावा पिसा सिंघाड़ा, साबूदाना, तिखुर व अन्य फलाहारी सामग्री की बिक्री भी हुई।





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