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‘राज’ पर पंचायत

जयपुर. राज्य सरकार पंचायती राज विभाग को 29 विषय सौंपने के लिए गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने पर फैसला नहीं ले पाई और रिपोर्ट को लागू करने के लिए तय किया गया वक्त निकल गया।

करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री को सौंपी गई इस रिपोर्ट के पहले चरण को तत्काल प्रभाव से और दूसरे चरण को वर्ष 2007 तक लागू कर दिया जाना था, लेकिन सरकार ने इस पर विचार ही नहीं किया। कटारिया भी समिति की रिपोर्ट लागू नहीं किए जाने से खफा हैं।

उनका कहना है कि उन्होंने लगातार बैठकें करके रिपोर्ट तैयार की थी। दो साल बाद भी रिपोर्ट लागू नहीं की गई है। समिति के एक अन्य सदस्य और मंत्री ने बताया कि रिपोर्ट लागू नहीं होने से पंचायती राज विभाग का भारी नुकसान हुआ है। समिति के सदस्य एक मंत्री ने बताया कि रिपोर्ट के नतीजों से शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी घबरा गए थे, इसलिए वे समिति की ज्यादातर बैठकों में आए ही नहीं।

बाद में कटारिया ने जब समिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी तो वे कटारिया से खफा भी हुए कि उन्होंने समिति को ऐसी रिपोर्ट क्यों दे दी, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा विभाग पंचायती राज में शामिल किया जा रहा है। इसे लेकर दोनों नेताओं के रिश्तों में कड़वाहट भी रही।

समिति में कौन-कौन?
अध्यक्ष : गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, अध्यक्ष।
सदस्य : शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी। खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीण। सामाजिक न्याय मंत्री मदन दिलावर। पंचायती राज मंत्री कालूलाल गुर्जर।
सचिव : एमके खन्ना, प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग।

पंचायती राज को मजबूत करने के लिए प्रस्ताव
सुविधाएं
-वार्ड पंच, पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्यों, जिला प्रमुखों, प्रधानों, सरपंचों आदि के मानदेय बढ़ाना।
-हर पंचायत पर सभी सुविधाओं से युक्त पंचायत संदर्भ केंद्र बनाए जाएं।
-हर पंचायत पर सुव्यवस्थित मिनी सचिवालयों की स्थापना की जाए।
-जिला आयोजना समितियों को फंड।

कर
-पर्यटन स्थलों से होने वाली आय पर कर।
-भूमि विक्रय पर सरचार्ज।
-नदी-नालों से सिल्ट संग्रहण पर कर।
-बजरी संग्रहण पर कर।
-खदानों से मिलने वाले खनिजों पर कर।
-गृहकर, नए घर बनाने पर अनुमति शुल्क, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कर, प्रवेश कर।

कामकाज को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया
-जिन विभागों की गतिविधियों और स्टाफ का हस्तांतरण पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों पर हो चुका है, उन विभागों के सचिव और विभागाध्यक्ष हस्तांरित स्टाफ से सीधे कोई पत्राचार नहीं करेंगे। अगर पत्राचार जरूरी है तो जिला परिषद के जिला प्रमुख या सीईओ, पंचायत समिति के प्रधान या बीडीओ आदि से ही किया जा सकता है।
-लक्ष्यों के आबंटन, प्रशिक्षण, मोनिटरिंग आदि के दायित्व संबंधित विभाग के ही रहेंगे।
-सौपे गए विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को दौरे या छुट्टी की मंजूरी पंचायती राज विभाग के अधिकारी ही देंगे।
-विभागों का पूरा बजट पंचायती राज विभाग को देना होगा। इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान करने होंगे।
-हस्तांतरित स्टाफ की एसीआर जिला परिषद के सीईओ या पंचायत समिति के बीडीओ भरेंगे।
-स्टाफ के मामले में 17 सीसी के नोटिस देने का अधिकार सिर्फ सीईओ और बीडीओ को होगा, जबकि पैतृक विभाग 16 सीसी के नोटिस ही दे सकेगा।
-स्टाफ के तबादले संबंधित विभाग ही करेगा, लेकिन हस्तांतरित स्टाफ पर नियंत्रण पंचायती राज विभाग का रहेगा।
-इमिजिएट कंट्रोलिंग अथॉरिटी पंचायती राज विभाग होगा, जबकि कैडर कंट्रोल अथॉरिटी पैरेंटल डिपार्टमेंट रहेगा।

समिति ने इन सिफारिशें को क्यों माना?
‘‘समिति सहमत है कि संविधान के 73वें संशोधन की 11वीं अनुसूचि में वर्णित 29 विषयों को मय स्टाफ व बजट तीन चरणों में हस्तांतरित कर दिया जाए।

सिफारिश 3.2 ऐसे सौंपे जाएं विभाग
समिति ने मुख्यमंत्री को रिपार्ट सौंप दी। इस पर कैबिनेट मीमो तैयार कर लिया गया। कैबिनेट मीमो पर टिप्पणी लिखी गई है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए कार्मिक और विधि विभाग की सहमति जरूरी नहीं है।

समिति की अहम सिफारिशें
पंचायती राज संस्थाओं को स्टाफ और फंड के साथ तीनों स्तर पर कामकाज सौंप दिया जाए।
काम इस तरह सौंपा जाए कि तीनों स्तरों पर पंचायती राज संस्थाएं स्वशासी इकाइयां बन जाएं।
पंचायती राज संस्थाएं तीनों स्तरों पर प्रभावी ढंग से विभागीय गतिविधियों का निष्पादन करें।
यह काम सुनिश्चित तरीके से किया जाए, ताकि इसमें किसी तरह का विलंब नहीं हो।

>> मैंने रिपोर्ट 2005 में ही मुख्यमंत्री को सौंप दी। समय निकल गया तो मैं क्या करूं। रिपोर्ट लागू करने की जिम्मेदारी तो मुख्यमंत्री की थी।
-गुलाबचंद कटारिया, गृह मंत्री व कमेटी के अध्यक्ष

>> मैंने कुछ बैठकों में भाग लिया था, कुछ में नहीं लिया, लेकिन कमेटी की फाइनल रिपोर्ट पर मेरे ही हस्ताक्षर हैं।
-घनश्याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री व समिति के सदस्य





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