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पानी ने ली तीसरी जान

जयपुर. dead दूषित पानी पीने से बीमार एक और व्यक्ति की जान चली गई। एक सप्ताह में दूषित पानी से तीसरी मौत हुई है। सूरजपोल इलाके में श्रीराम कॉलोनी के 68 वर्षीय कल्याण सहाय रावत को सोमवार को एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सैटेलाइट अस्पताल के कनिष्ठ मेडिसन विशेषज्ञ हरीश छाबड़िया को निलंबित कर दिया।

उधर, चिकित्सा अधिकारी इसके लिए दूषित पानी को जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं हैं। कल्याण सहाय की मौत की खबर से सूरजपाल इलाके के लोग सड़कों पर उतर आए। आस-पास की दुकानें बंद हो र्गई। गुस्साए लोगों ने सीएमएचओ को तत्काल बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर रास्ता जाम कर दिया।

उधर, जिला प्रशासन की ओर से भिजवाए गए पानी के टैंकरों को भी लोगों ने खाली होने नहीं दिया। बाद में आमेर के एसडीएम हरिंद्रसिंह और सीएमएचओ डॉ. आर.सी. शर्मा ने लोगों को समझाया तब दोपहर बाद लोग टैंकरों का पानी लेने के लिए राजी हुए। दूषित पानी का खौफ अधिकारियों में भी इस कदर छाया हुआ था कि वे मिनरल वाटर का ही इस्तेमाल कर रहे थे। child

रास्ता जाम कर रहे लोगों ने पहले तो जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग की। बाद में वे वहीं पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीमार लोगों को सैटेलाइट अस्पताल से जबरन छुट्टी दी जा रही है।

कल्याण सहाय रावत को भी रविवार को जबर्दस्ती डिस्चार्ज कर दिया गया। सोमवार दोपहर उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। मंगलवार को उसकी मौत हो गई। कल्याण सहाय रावत की मौत को लेकर भी जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग लीपापोती करने की कोशिश करता रहा। सीएमएचओ व उपखंड अधिकारी ने रावत की मौत की वजह दमा व बुढ़ापा बताया है।

सीएमएचओ से धक्कामुक्की
पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं करने वाले लोगों ने चिकित्सा विभाग का विरोध किया। लोग धरने के दौरान लापरवाही बरतने पर सीएमएचओ को बर्खाश्त करने की मांग की। जिला शहर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव महेश शर्मा ने बताया कि चिकित्सा विभाग की ओर से लगाए जा रहे शिविरों में कुछ व्यवस्था नहीं है, लोगों को सैटेलाइट अस्पताल भेज रहे है जहां से जबर्दस्ती डिस्चार्ज कर रहे हैं, जबकि सीएमएचओ ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

मिलीभगत का आरोप
bisleri वहां औरतों ने मोर्चा संभाल लिया। जब स्थानीय लोग महिलाओं को समझाने लगे तो महिलाओं ने अफसरों से मिलीभगत का आरोप लगाकर विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना था कि बच्चे बीमारी से तड़प रहे हैं और आप घर जाने के लिए कह रहे हैं।

खुशी ने पूछा- निशी कहां है
दूषित पानी की पहली शिकार भागचंद की एक साल की निशी हुई थी। उसकी बड़ी बहन खुशी भीड़ को देखकर भागचंद से पूछ रही थी कि अपनी निशी कहां है और रोने लग जाती है। खुशी भी दूषित पानी पीने से बीमार है। भागचंद का कहना है कि प्रशासन ने मुआवजा देने की तो घोषणा कर दी, लेकिन आज तक न तो मुआवजा मिला, न ही कोई हाल जानने आया।

विधायक का भी विरोध
कल्याण रावत की मौत की खबर मिलते ही विधायक बृजकिशोर शर्मा मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके वहां पहुंचते ही लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। लोगों की शिकायत थी कि नौ दिन बाद भी स्थानीय पार्षद मौके पर नहीं आई हैं।

पोस्टमार्टम नहीं
दूषित पानी की वजह से सूरजपोल इलाके में तीन मौत हो चुकी हैं। चिकित्सा विभाग की ओर से एक का भी पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। विभाग का कहना है कि ये साधारण मौतें हैं, पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं।

टंकियां साफ नहीं
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि इलाके में रखी टंकियां पिछले आठ महीनों से साफ नहीं हुई हैं। कई बार इंजीनियरों को कह चुके, लेकिन कोई ध्यान ही नहीं देता है।





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