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भाई की रोशनी के लिए.

चेन्नई. छोटे भाई को वह इतना चाहता था कि उसकी आंखों की खोई रोशनी लौटाने के लिए अपनी जान तक दे दी, लेकिन उसका मकसद फिर भी पूरा न हो सका।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक उत्तरी चेन्नई की एक बस्ती में रहने वाला ऑटो चालक रविकुमार अपने छोटे भाई कार्तिक को बहुत चाहता था। कार्तिक की आंखों की रोशनी चली जाने से व्यथित रविकुमार ने मंगलवार को अपने घर पर फांसी लगा ली। उसने खुदकुशी से पहले लिखे पत्र में अपनी आंखें भाई को देने की इच्छा जाहिर की थी।

रविकुमार का पत्र उसकी मौत के छह घंटे बाद जब मिला, तब तक उसकी आंखें कार्तिक की जिंदगी रोशन करने के काबिल नहीं बचीं थी। दिलचस्प बात यह भी है कि रविकुमार को यह नहीं मालूम था कि आंखों का प्रत्यारोपण होने के बावजूद कार्तिक की दृष्टि लौटाई नहीं जा सकती थी, क्योंकि उसकी आंखों को जोड़ने वाली नसें ही क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।





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k d sharma
Thursday, 22nd Nov 2007, 9:37
yeh dukhad baat hai.