|
भोपाल. दिल्ली की एसकॉर्ट अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज मनोरिया के बैंक एकाउंट से 12 नवंबर को एक लाख रुपए कम हो गए। ये रुपए उन्होंने नहीं निकाले थे। इसकी शिकायत उन्होंने भोपाल के एमपी नगर थाने में की, क्योंकि उनका एकाउंट आईसीआईसीआई बैंक की एमपी नगर ब्रांच में है।
मामला खुला तो सामने आया कि एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ई-बैंकिंग की कमजोरियों का लाभ उठाकर कई लोगों के एकाउंट से रुपए गायब कर रहा है। गिरोह के लोग मेरठ में पकड़े गए हैं।
राजधानी के जाने-माने डॉक्टर पीसी मनोरिया के बेटे पंकज ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं जिनके एकाउंट से रुपए कम हुए। देशभर की पुलिस और बैंकों को इस तरह की शिकायतें मिलीं। नोएडा के अजय श्रीवास्तव के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनके 50 हजार रुपए निकाल लिए गए।
कौन पकड़ाया :
इस गिरोह के पांच लोग मेरठ में पकड़े गए हैं, जो उच्चशिक्षित और संभ्रांत घरों के हैं। उनसे हुई पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि गिरोह की सरगना एक नाईजीरिया की एक महिला है जो कंप्यूटर हेकर की मदद से इस काम को अंजाम देती है। मेरठ की सिविल लाइन पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद गुलरेज, अनिल शर्मा, कुलदीप वर्मा, नकुल त्यागी को पकड़ा है। इन्होंने पैसे निकालना कबूल किया है।
कैसे काम करता है गिरोह
मामले की जांच से जुड़े मेरठ के नगर पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने दैनिक भास्कर को फोन पर बताया कि गिरोह के लोग ई-बैंकिंग से जुड़े लोगों को बैंक के फर्जी मेल आईडी से मेल करते हैं। इसमें वे कहते हैं कि बैंक को अपनी जानकारियां अपडेट करना है। कई जानकारियों के बाद दो विकल्पों में लागइन आईडी और पासवर्ड पूछे जाते हैं। यह जानकारी मिलते ही गिरोह राशि अपने गिरोह से जुड़े लोगों के खातों में ट्रांसफर करते हैं।
फर्जी नामों से खाते हैं
गिरोह का जाल पूरे देश में फैला है। इसने निजी बैंकों में फर्जी नाम से अपने लोगों के खाते खोलकर एटीएम सुविधा ले रखी है। अधिकांश खाते करंट एकाउंट के हैं, जिसमें से अधिक राशि निकाली जा सकती है। जैसे ही राशि गिरोह के खाते में आती है, उसे एटीएम से निकाल लिया जाता है। जब व्यक्तिम अपना एकाउंट चेक करता है तब उसे पता चलता है कि उसके खाते से राशि गायब है।