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जयपुर. प्रदेश में पांच हजार चिकित्सा संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के सरकारी ऐलान के बाद प्रदेश में विभिन्न विभागों में काम कर रहे करीब 60 हजार संविदा कर्मचारियों के नियमन का सवाल उठा खड़ा हुआ है। अब कर्मचारी यूनियनों के नेता पूछ रहे हैं कि जब एक विभाग के संविदा कर्मियों का नियमन हो सकता है तो फिर बाकी के नियमन में देरी क्यों?
प्रदेश में शिक्षा विभाग, बिजली विभाग, पीएचईडी, जल संसाधन, कॉलेज शिक्षा, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन विभाग, कृषि, पशु पालन सहित विभिन्न विभागों में संविदा पर भारी संख्या में कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें 26 हजार पैरा टीचर, 7 हजार शिक्षा सहकर्मी, 6 हजार लोकजुंबिश के संविदा कर्मचारी हैं।
वित्त और विधि विभाग ने लगाया था अड़ंगा : इसी वजह से जब चिकित्सा संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का सवाल आया तो सबसे पहले वित्त और विधि विभाग ने अड़ंगा लगाया था, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की वजह से नए रूल्स बनाने पर सहमति हो गई। इससे भी वित्त और विधि विभाग के अधिकारी राजी नहीं थे।
दोनों विभागों के अधिकारियों का तर्क था कि अगर चिकित्सा संविदा कर्मियों को नियमित किया गया तो बाकी विभागों के संविदा कर्मचारियों को भी नियिमत करना होगा। यह मामला मुख्य सचिव डीसी सामंत की अध्यक्षता में हुई दो-तीन बैठकों में प्रमुखता से उठा था, लेकिन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद कोई भी अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
* सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति दो तरह से होती है यानी या तो वे एडहॉक होते हैं या फिर वे रेगुलर। चिकित्सा संविदा कर्मियों को रेगुलर करने के लिए नए रूल्स बनाए जा रहे हैं। अगर अन्य किसी विभाग में कार्यरत संविदा कर्मियों को भी नियमित करना होगा तो उनके लिए भी इसी तरह नियम बनाने होंगे।
महेश भगवती, सचिव, विधि विभाग, राजस्थान सरकार
* शिक्षा विभाग के पैरा टीचर चिकित्सा संविदाकर्मियों से काफी पुराने हैं। जब चिकित्सा संविदाकर्मियों के लिए नए रूल्स बन सकते हैं तो पैरा टीचर और संविदा पर काम करने वाले अन्य कर्मियों के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा? बाकी संविदाकर्मियों के साथ यह सौतेला व्यवहार है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मूलचंद गुर्जर, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज कर्मचारी संघ
* चिकित्सा संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के फैसले का स्वागत है, लेकिन सवाल यह है कि अब अन्य विभागों में लगे संविदा कर्मचारी इस नियमन के पात्र क्यों नहीं है।
महावीर सिहाग, प्रदेश महासचिव, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत