Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsChhattisgarhRaipur Raipur

जांजगीर जिले में गर्भवती महिला की नसबंदी

जांजगीर. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनीडीह में नसबंदी शिविर में गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी टेस्ट किए बिना ही डाक्टरों ने आपरेशन कर दिया। डाक्टरों की लापरवाही के कारण पीड़ित गरीब महिला अब गर्भपात के लिए भटक रही है।

बम्हनीडीह में पिछले माह १ अक्टूबर को नसबंदी शिविर लगा था। इसमें लक्ष्य पूरा करने के लिए अफरीद की मितानिन विमलाबाई लाठिया व स्वास्थ्य कार्यकर्ता शैलबाला दुबे ने गांव की ३0 वर्षीय तेरसबाई पति भुरवा यादव को प्रेरित किया।

शिविर में तेरसबाई के खून, पेशाब की जांच तो की गई, पर प्रेगनेंसी टेस्ट हुआ ही नहीं, जबकि चिकित्सा विभाग की शर्तो के अनुसार नसबंदी करने के पहले खून, पेशाब, प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है। नसबंदी कराने के बाद महिला घर आ गई। आज उसके पेट में अचानक दर्द उठा, तब उपचार के लिए उसे चांपा लाया गया। चिकित्सकों ने उसे 3 महीने का गर्भ होने की बात बताई। यह सुनकर तेरसबाई व उसके परिजन सन्न रह गए।

चार बच्चे हैं महिला के
रोजी-मजदूरी करने वाली तेरसबाई की तीन लड़कियां व एक लड़का है। लड़कियों के बाद एक साल पहले पुत्र होने पर उसने नसबंदी करा ली थी।

पहले भी हो चुकी ऐसी घटना
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनीडीह के लिए यह कोई नई बात नहीं है। करीब एक दशक पहले अफरीद के ही रामकुमार केंवट ने अपनी पत्नी की नसबंदी कराई थी। आपरेशन के बाद आज उसे तीन बच्चे और हो चुके हैं।

>> महिलाओं की लापरवाही के चलते ऐसा कभी-कभी हो जाता है। महिलाओं से प्रेगनेंसी के बारे में पूछा जाता है। ऐसी कोई बात सामने नहीं आने पर उनका टेस्ट नहीं किया जाता।
डा. सरिता नागर्ची, मेडिकल आफिसर

>> आपरेशन के दौरान बच्चदानी की साइज देखी जाती है। इससे पहले की प्रक्रिया प्रेगनेंसी व खून-पेशाब जांच करने वालों द्वारा की जाती है। ऐसे मामले में आपरेशन कराने वाली महिलाओं की लापरवाही ज्यादा होती है। सब कुछ उन्हीं पर डिपेंड करता है। महिलाओं को जानकारी होती है कि गर्भधारण कब से हुआ है। फिर भी वे आपरेशन के लिए राजी हो जाती हैं।
डा. चंद्रा, सर्जन





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: