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अमृतसर. एसजीपीसी के प्रधान का चुनाव भी शुक्रवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही करेंगे। वीरवार को तेजा सिंह समुंद्री हाल में हुई एसजीपीसी सदस्यों की बैठक में इस बारे में सभी अधिकार बादल को ही सौंप दिए गए। बादल की प्रधानगी में हुई बैठक में 125 सदस्यों ने उम्मीदवार चुनने का अधिकार उन्हें सौंपा। विरोधी गुट के सदस्यों ने बैठक का बायकाट किया। एसजीपीसी के 185 सदस्यों में से 4 की मौत हो चुकी है। 23 नवंबर को 181 सदस्य वोट डालेंगे। इस मौके पर पांच तख्तों के सिंह साहिबान भी मौजूद रहेंगे, लेकिन उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि बैठक में उन्होंने एसजीपीसी सदस्यों की राय हासिल की है। किसके नाम पर सहमति बनी, इस सवाल का जवाब बादल टाल गए। पिछली बार की तरह उन्होंने कहा ‘छड्डो जी, कोई होर गल करिए, कल सब नूं प्रधान बारे पता लग ही जाणा ए।’ उधर, पंथक हलकों में चर्चा है कि वर्तमान प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ ही प्रधान बन सकते हैं।
प्रधान पद के चाहवानों की सूची लंबी होती जा रही है। यूं तो मक्कड़ के बाद पूर्व प्रधान किरपाल सिंह बडूंगर का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां और वरिष्ठ सदस्य रघुजीत सिंह विर्क भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बादल द्वारा भेजी जाने वाली पर्ची में किसका नाम होगा, यह तो शुक्रवार को इजलास में ही पता चलेगा।
सुखबीर ने भी किया संबोधित
एसजीपीसी के सदस्यों को अकाली दल के कार्यकारी प्रधान और सांसद सुखबीर सिंह बादल ने भी संबोधित किया। सुखबीर के कार्यकारी प्रधान बनने के बाद सदस्यों को संबोधित करने का उनका यह पहला मौका था। इससे पहले उम्मीदवार के चयन से एक दिन पहले सदस्यों को केवल अकाली सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल संबोधित करते रहे हैं।
हमारे लिए राजनीति और धर्म एक : मक्कड़
एसजीपीसी के प्रधान मक्कड़ से जब पूछा गया कि क्या गुरुद्वारा एक्ट 1925 में अकाली सुप्रीमो बादल को सभी अधिकार सौंपने का नियम है? तो उन्होंने सवाल को टालते हुए कहा कि सभी पार्टियों में ऐसा होता है। सिख धर्म में राजनीति और धर्म एक है, इसलिए इसे विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
मक्कड़ जीते तो तीसरा कार्यकाल
एसजीपीसी का 28 बार प्रधान बनने का अनूठा रिकार्ड गुरचरण सिंह टोहरा के नाम है। उनके बाद कोई भी लगातार दो बार से ज्यादा प्रधान नहीं बन सका। जत्थेदार टोहरा के बाद बीबी जागीर कौर, किरपाल सिंह बडूंगर, जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी और फिर अवतार सिंह मक्कड़ प्रधान बने। अगर मक्कड़ इस बार फिर जीत जाते हैं तो यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा।