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बेटी होने पर जान दी

फिरोजपुर. नौवीं बेटी पैदा होने के बाद बाप ने वीरवार को रेलगाड़ी के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। परिवार के सदस्यों ने बताया कि जनकराज निवासी गांव बेटी होने पर जान दीअहमद खां केवल बेटियां पैदा होने के कारण बेहद परेशान था। नौवीं बार भी जब बेटा पैदा नहीं हुआ तो वह टूट गया।

बेटी होने पर वह पागलों की तरह व्यवहार करने लगा, जिसके चलते उसने सुबह 11:30 बजे जालंधर से फिरोजपुर आ रही अहमदाबाद-जम्मूतवी एक्सप्रैस गाड़ी के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। जी.आर.पी. ने शव को पोस्टमार्टम के बाद वारिसों को सौंप दिया है। मृतक की सभी बेटियों की आयु 15 वर्ष से कम बताई जा रही है।

बहादुर धनपति : नौ बेटियों को जन्मा और पाला भी
वीरेंद्र दूहन.
पानीपत: हरियाणा के बिंझौल गांव में एक घर ऐसा भी है जहां पर नौ बेटियों ने जन्म लिया। घर में तीन बेटे तो हुए, लेकिन तीनों ने ही जन्म के बाद दम तोड़ दिया। बिंझोल की धनपती देवी ने इसे भाग्य का विधान समझकर स्वीकार किया। पति के न रहने पर खुद मजदूरी करके उन्होंने बेटियों को पाला। वे कहती हैं कि इन बेटियों ने मुझे दामाद के रूप में पांच बेटे दिए हैं। उन्होंने अपनी पांच बेटियों को अच्छी शिक्षा देने के बाद शादी कर सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का प्रयास किया। उनकी एक बेटी अभी स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रही है।

दस साल पहले लंबी बीमारी के बाद धनपती के पति सूरजभान की मौत हो चुकी है। घर की माली हालत के चलते छोटी बेटी की शिक्षा उसकी बहन की सुसराल में चल रही है। धनपती घर पर अकेले धागे की फैक्टरी में मजदूरी कर पेट का भरण पोषण कर रही है।

दामादों को बेटा माना : धनपती अपने पांचों दामादों को अपना बेटा मानती है। धनपती का कहना है कि भगवान ने भले ही उसे बेटा नहीं दिया, लेकिन वे अपने दामादों को बेटा ही मानती है। धनपती का परिवार भले ही गरीब था, लेकिन ग्रामीणों और समाजसेवी संगठनों ने उसका साथ दिया। पांचों बेटियों की शादी में उसकी मदद की गई। महिला अपनी सभी लड़कियों को भले ही पढ़ा नहीं सकी हो, लेकिन वह चाहती है कि उसकी सबसे छोटी बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो।





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