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बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीमा पर छोड़ेगी पुलिस

अजमेर. दरगाह इलाके से पकड़े गए सात बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर करने के आदेश गुरुवार को विदेशी नागरिक पंजीयन अधिकारी ने जारी कर दिए हैं। इसके तहत बांग्लादेशियों को सीमा पर तैनात बीएसएफ कैम्प में छोड़ा जाएगा। जिला पुलिस का दल शुक्रवार को इन्हें लेकर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होगा।

दरगाह में विस्फोट की घटना के बाद खुफिया पुलिस और जिला पुलिस ने दरगाह इलाके में अवैध तौर पर बसे बांग्लादेशी नागरिकों की धरपकड़ की थी। शक के आधार पर करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनके बारे में तस्दीक की गई थी। इसमें अब तक एक महिला सहित सात लोगों की बांग्लादेशी होने की पुष्टि हुई है।

खुफिया पुलिस ने तस्दीक के बाद इन्हें पुलिस को सौंप दिया। इनमें से मसूद और उमर शेख खादिम कलीमुद्दीन के यहां नौकर के तौर पर रह रहे थे। बाबुल पुत्र असगर, और लालशाह अंदरकोट इलाके में करीब दस साल से खुद को पश्चिम बंगाल का नागरिक बताकर रह रहे थे। पुलिस ने तस्दीक के बाद सात लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया करार दिया। इनमें एक महिला और उसके तीन बच्चे भी हैं। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने मसूद को अलवरगेट थाने और उमर शेख को कोतवाली थाने में रखा था।

विदेशी नागरिक पंजीयन अधिकारी एवं एएसपी सीआइडी गजानंद वर्मा ने गुरुवार को बांग्लादेशी नागरिकों को देश से बाहर भेजने के आदेश जारी किए। इसके तहत पुलिस दल बांग्लादेशियों को लेकर पश्चिम बंगाल में सीमा पर तैनात बीएसएफ कैम्प जाएगा। बीएसएफ के अफसर इन्हें सीमा पार भेजने की कारवाई करेंगे। एसपी एस सेंगाथिर ने कार्रवाई की पुष्टि की है।

शरण देने वाले खादिम पर मुकदमा
बांग्लादेशी घुसपैठियों को शरण देने के मामले में पुलिस ने खादिम कलीमुद्दीन चिश्ती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। खुफिया पुलिस ने बांग्लादेशी मसूद व उमर शेख को खादिम कलीमुद्दीन के घर से पकड़ा था। दोनों नौकर के तौर पर रहे रहे थे। सीआइडी के सब इंस्पेक्टर विजय कुमार और एएसआई महेन्द्र पलासिया ने इस मामले में दो अलग-अलग रिपोर्ट दरगाह थाने में पेश की। एसपी एस सेंगाथिर के आदेश से गुरुवार को दरगाह थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

कत्ल के मामले में फरार था मसूद : सीआइडी एएसपी गजानंद वर्मा ने बताया कि मसूद के बारे में तफ्तीश की गई। वह 2004 में वीजा से अजमेर आया था। उसका वीजा जनवरी 05 तक था। अवधि समाप्त होने के बाद वह पहचान छिपाकर यहां रह रहा था। पूछताछ में मसूद ने कबूल किया कि बांग्लादेश में वह कत्ल के दो मामलों में अभियुक्त है। विस्फोट में उसका हाथ उड़ गया था।

विस्फोट कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ? इस बारे में वह साफ तौर पर नहीं बता रहा है। दूसरी ओर मसूद को घर में पनाह देने वाले खादिम कलीमुद्दीन ने भी कबूल किया कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी के एक सांसद की सिफारिश पर उसने मसूद को शरण दी।





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